जनता कर्फ्यू से शुरू हुई जंग, वैक्सीन से जीत की ओर
गाजियाबाद। कोरोना ने दस्तक दी तो गुलजार रहने वाला गाजियाबाद प्रधानमंत्री की एक अपील पर आज ही के दिन 22 मार्च 2020 को थम गया था। जनता कर्फ्यू के चलते ट्रेनों और बसों के चक्के रुक गए थे तो स्कूल-कॉलेजों, औद्योगिक इकाईयों, प्राइवेट व अधिकांश सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा पसर गया था। सड़कें और बाजार सूने हो गए थे। सोमवार को जनता कर्फ्यू को पूरा एक साल हो गया है, लेकिन लोगों के दिलों में वह नजारा आज भी ताजा है। 46 लाख की आबादी वाला जिला धीरे-धीरे कोरोना संक्रमण से बाहर निकल रहा है, लेकिन उसकी वजह से हुए नुकसान के निशान आज भी दिखाई दे रहे हैं।
चार मार्च 2020 को गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन की एक सोसायटी में कोरोना का पहला पॉजिटिव केस आया था। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने पूरी सोसायटी को सील कर दिया था। इसके बाद से गाजियाबाद जिले में भी कोरोना का डर लोगों में दिखने लगा था। स्वास्थ्य विभाग से लेकर जिला प्रशासन के अधिकारी कोरोना के आने वाले खतरे को भांपकर अंदरूनी तौर पर तैयारी में जुट गए थे। लोगों में दहशत का माहौल पैदा न हो, इसके लिए यह तैयारी भी बिना शोर-शराबे के की जा रही थी। 19 मार्च 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च को एक दिन का जनता कर्फ्यू लगाए जाने की घोषणा की तो गाजियाबाद के लोगों ने भी इसमें पूरा सहयोग किया। 22 मार्च को सुबह छह से रात 9 बजे तक जनता कर्फ्यू रहा तो दुकानों से लेकर मॉल्स-मल्टीप्लेक्स, सब्जीमंडी और जिम से लेकर निजी और सार्वजनिक वाहन, ट्रेनें सभी बंद रहे। हाउसिंग सोसायटियों के दरवाजे भी आवाजाही के लिए बंद कर दिए।
पौने दो सौ ट्रेनों की आवाजाही हुई थी प्रभावित
गाजियाबाद रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन करीब पौने दो सौ यात्री ट्रेनों का आवागमन होता था। जनता कर्फ्यू के दिन गाजियाबाद स्टेशन भी सूना हो गया था। हालांकि बीच रास्ते में मौजूद ट्रेनों को अपने गंतव्य तक पहुंचाया गया था, लेकिन दिल्ली की ओर से किसी ट्रेन ने अपना सफर शुरू नहीं किया था। सैकड़ों ट्रेनें रद्द हो जाने के कारण यात्रियों को परेशानियों का सामना भी करना पड़ा था।
सैनिटाइजेशन में जुट गए थे निगमकर्मी-अफसर
कई सरकारी और गैर सरकारी विभाग बंद हो गए थे, लेकिन नगर निगम का काम बढ़ गया था। निगम ने करीब 50 छोटे-बड़े वाहन सैनिटाइजेशन के लिए सड़कों पर उतार दिए थे। साफ-सफाई पर खास ध्यान दिया गया और कूड़ा उठवाया गया। लॉकडाउन के दौरान नगर निगम ने सैनिटाइजेशन का काम और बड़े स्तर पर शुरू करा दिया गया था। मैनुअल ओर ऑटोमेटिक सैनिटाइजेशन की मशीनें खरीदी गईं। लॉकडाउन के दौरान नगर निगम ने कर्मचारियों को मास्क, सैनिटाइजर, साबुन और दस्ताने बांटे।
थम गए थे विकास कार्य और टैक्स वसूली
पहले जनता कर्फ्यू और फिर लॉकडाउन की वजह से बीते साल विकास कार्यों का पहिया थम गया था। नगर निगम के सड़क, सीवर, नाली, इंटरलॉकिंग टाइल्स से गली निर्माण के करीब 60 करोड़ के विकास कार्य थम गए थे। वित्तीय वर्ष का अंतिम माह होने के बावजूद मार्च 2020 में टैक्स वसूली पर भी ब्रेक लगा दिया गया था। इससे नगर निगम को भी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा था। लॉकडाउन खत्म होने के बाद नगर निगम के यह रुके विकास कार्य शुरू हो पाए। उधर, सभी प्रोजेक्ट पर काम थम गया। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे समेत सभी अब प्रोजेक्ट पर पूरी तरह से निर्माण थम गया।
फ्लैटों में ‘कैद’ हो गए थे हाउसिंग सोसायटियों के लोग
राजनगर एक्सटेंशन, क्रॉसिंग रिपब्लिक, इंदिरापुरम, वैशाली, वसुंधरा, सिद्धार्थ विहार, एनएच-9 से सटी बहुमंजिला रिहाइशी सोसायटियों में करीब 6 लाख से ज्यादा लोग फ्लैटों में कैद हो गए थे। बच्चों का खेलना-कूदना सब बंद हो गया था। लोगों को हाउसिंग सोसायटियों के पार्क तक आने की भी मनाही थी। यह व्यवस्था करीब तीन महीने तक चली।
दूध, दवा, राशन की हुई थी होम डिलीवरी
कोरोना संक्रमण काल में दूध से लेकर दवा और राशन की होम डिलीवरी शुरू हो गई थी। हालांकि इन जरूरी सामानों की दुकानें लॉकडाउन में भी खुली हुई थीं, लेकिन हाउसिंग सोसायटियों में कोरोना के केस आने की वजह से वहां के लोगों को बाहर आने-जाने की इजाजत नहीं थी। जिला प्रशासन ने पहली बार क्षेत्र के दूध, राशन और दवाओं के दुकानदारों की सूची तैयार कराकर सोसायटियों में उनके नंबर जारी कर दिए गए थे। इन दुकानदारों को फोन पर ऑर्डर देकर सामान मंगाया जा सकता था।
नगर निगम ने रोजाना आठ हजार लोगों को दिया भोजन
लॉकडाउन के दौरान लोगों के रोजगार बंद हुए तो दैनिक मजदूर वर्ग के लोगों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया था। इसके चलते नगर निगम ने नेहरू नगर सेकेंड में और वसुंधरा में दो सामुदायिक रसोई की शुरूआत की। नगर निगम के तत्कालीन नगर आयुक्त दिनेश चंद्र सिंह ने अधिकारियों, ठेकेदारों के सहयोग से रसोई की शुरुआत कर रोजाना करीब चार हजार लोगों को भोजन दिया। बाद में प्रशासन से भी मदद मिली तो इन रसोई की क्षमता बढ़ा दी गई। निगम ने कई माह तक करीब आठ हजार लोगों को रोजाना भोजन खिलाया था।