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आरक्षण बदलने से कहीं बिगड़े समीकरण तो कहीं मैदान में लौटे उम्मीदवार

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आरक्षण बदलने से कहीं बिगड़े समीकरण तो कहीं मैदान में लौटे उम्मीदवार
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गाजियाबाद। जिला पंचायत चुनाव के लिए नए सिरे से वार्ड आरक्षण जारी होने के बाद समीकरण बदल गए है। बीते आरक्षण में चुनावी दौड़ से बाहर हुए कई भावी उम्मीदवार अब मैदान में लौट आए हैं। इससे आने वाले समय में अगर उनकी वार्ड में जीत होती है तो अध्यक्ष पद के लिए दावेदारों की फेहरिस्त लंबी हो जाएगी। खासकर भाजपा के अंदर ही कई बड़े दावेदार होंगे। उधर, कुछ लोगों को अब वार्ड बदलना होगा, क्योंकि नए आरक्षण के तहत उनका वार्ड आरक्षित हो गया है जिस पर जातिगत हिसाब से अब वो चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। कई वार्डों में इसी तरह से समीकरण बदल गए हैं।
नया आरक्षण पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष बसंत त्यागी के लिए फायदेमंद साबित हुआ है। बीते आरक्षण में उनका वार्ड-14 ओबीसी महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया था जिससे उनकी पत्नी पूर्व में जिला पंचायत सदस्य भी रही हैं। सीट ओबीसी महिला होने के बाद उनके लिए चुनाव लड़ने का रास्ता बंद हो गया था लेकिन अब हाईकोर्ट के आदेश पर जारी हुई संशोधित आरक्षित सूची में उनका वार्ड अनारक्षित हो गया है। इससे उनके लिए अब दो विकल्प पैदा हो गए हैं, वो स्वयं चुनाव लड़ सकते हैं या फिर अपनी पत्नी ममता त्यागी को चुनाव मैदान में उतार सकते हैं। लोनी से जुड़े वार्ड-13 पर भी अब समीकरण बदल गए हैं। अभी तक इस वार्ड से निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी मावी जीत कर आईं थीं। पुरानी आरक्षण सूची में यह वार्ड महिला के लिए आरक्षित किया गया था, जिसके हिसाब से लक्ष्मी मावी ही दोबारा से इस वार्ड से चुनाव लड़ने की तैयारी में थी लेकिन अब यह वार्ड अनारक्षित हो गया है। ऐसे में पति ईश्वर मावी भी अब चुनाव लड़ सकते हैं। उधर, वार्ड -6 से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे सामान्य जाति से आने वाले एक बसपा नेता को झटका लगा है। जातिगत हिसाब से वो अब वार्ड से चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। क्योंकि उनका वार्ड ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित हो गया है। उन्हें चुनाव लड़ने के लिए अब वार्ड बदलना होगा। इसी वार्ड से एक पूर्व बार सचिव भी चुनाव लड़ने की तैयारी में है, जिनके लिए सीट अनारक्षित होने से रास्ता साफ हो गया है।
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पूर्व मंत्री परिवार को भी बैठाने होंगे समीकरण
मुरादनगर क्षेत्र से आने वाले एक पूर्व मंत्री को भी अब वार्ड-6 और आठ पर नए समीकरणों से लड़ना होगा। अभी तक वार्ड छह से वो अपने पौत्र को चुनाव लड़ाने की तैयारी में थे लेकिन नए आरक्षण से वार्ड महिला वर्ग के लिए आरक्षित है। संभावना है कि अब वो यहां से अपनी पुत्रवधू को चुनाव मैदान में उतार सकते हैं। जबकि वार्ड आठ से अपने पौत्र को चुनाव लड़ा सकते है।
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