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जीडीए के पोर्टल से पास नहीं हो पा रहे नक्शे, लोग परेशान

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जीडीए के पोर्टल से पास नहीं हो पा रहे नक्शे, लोग परेशान
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गाजियाबाद। बहुमंजिला सोसायटियों सहित अधिक जोखिम वाले ऑनलाइन नक्शों को पास कराने में आ रही तकनीकी दिक्कतों का अब तक कोई समाधान नहीं हुआ है। बड़ी संख्या में अधिक जोखिम वाले नक्शे आवेदन के ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम (ओबीपीएएस) पोर्टल के फेर में फंसे हुए हैं। इसका नतीजा है बीते एक साल के अंदर अधिक जोखिम वाले 75 फीसदी से ज्यादा नक्शे तकनीकी दिक्कतों के चलते निरस्त हो चुके हैं।
जीडीए में अधिक जोखिम वाले 32 नक्शे ओबीपीएएस पोर्टल के जरिए जमा हुए, इनमें से केवल छह को स्वीकृति मिल सकी। शासन स्तर पर बीते माह प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में हुई जीडीए सहित विभिन्न प्राधिकरण के अधिकारियों की हुई बैठक में मामला उठा था। इसमें मामले को संज्ञान में लेते हुए सॉफ्टवेयर संबंधी तकनीकी दिक्कतों में सुधार की बात कही गई। इसके लिए जीडीए सहित अन्य प्राधिकरणों ने सुझाव दिए। इसके बावजूद ओबीपीएएस पोर्टल की तकनीकी दिक्कतें बरकरार हैं। इसी के चलते कई ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों के ऑनलाइन नक्शे निरस्त हो चुके हैं।
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आवासीय, व्यावसायिक व औद्योगिक भूखंडों के नक्शों को कम जोखिम और ग्रुप हाउसिंग व सोसायटियों के नक्शों को अधिक जोखिम की कैटेगरी में रखा गया है। बड़ी संख्या में अधिक जोखिम वाले नक्शे निरस्त होने की समस्या से बिल्डर परेशान हैं। समस्या के समाधान के लिए शासन स्तर से लगातार सॉफ्टवेयर में सुधार के लिए बिल्डर्स, जीडीए अधिकारियों और आर्किटेक्ट की ऑनलाइन मीटिंग आयोजित हो रही हैं। इसके बावजूद तकनीकी समस्याओं के समाधान की दिशा में बड़ी सफलता नहीं मिली है। जीडीए सीएटीपी आशीष शिवपुरी ने बताया कि ऑनलाइन नक्शा पास होने में तकनीकी दिक्कतों के समाधान का शासन स्तर प्रयास जारी है। ऑनलाइन पोर्टल संबंधी तकनीकी दिक्कतों पर प्राधिकरण के सुझावों के जल्द सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
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ओबीपीएएस में यह हैं दिक्कतें:
नक्शे आवेदन के ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम (ओबीपीएएस) पोर्टल पर कई दिक्कतें बरकरार हैं। ओबीपीएएस में कारणवश नक्शा निरस्त होने पर आवेदनकर्ता को छह माह के अंदर संशोधित नक्शा जमा करने की सुविधा दी गई है लेकिन संशोधित नक्शा जमा करने पर दोबारा जमा नहीं होता। नक्शा स्वीकृत होने के बावजूद डिजिटल सिग्नेचर पेंडिंग दिखाता है। ऑनलाइन जमा किए गए शुल्क की रिफंड की प्रक्रिया में तकनीकी बाधा है। नक्शे के ऑटो स्क्रूटनी में लंबा वक्त लगता है। ऐसे में ऑनलाइन नक्शा आवेदन करने वालों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
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