अनजान वीडियो कॉल से रहें अलर्ट, हो सकते हैं ब्लैकमेल
गाजियाबाद। गोपनीय बातें करने या रिकॉर्डिंग से बचने के लिए अगर आप वीडियो कॉल का इस्तेमाल कर रहे हैं तो सावधान हो जाएं। अन्य कॉल की तरह वीडियो कॉल भी नुकसानदायक साबित हो सकती है। जी हां, साइबर जालसाज ठगी करने के लिए अब वीडियो कॉल का इस्तेमाल कर रहे हैं। गैंग में शामिल युवतियां प्यार के झांसे में लेकर वीडियो कॉल करती हैं और खुद अश्लीलता की शुरूआत कर आपको भी ऐसा करने के के लिए दबाव डालेंगी। उनके झांसे में आते ही शुरू हो जाता है ब्लैकमेलिंग का खेल। बीते दिनों साइबर सेल में इसी तरह की 30 से अधिक शिकायतें मिलीं, गैंग की सक्रियता बताने के लिए काफी है।
साइबर एक्सपर्ट के मुताबिक, एटीएम व खातों से रकम उड़ाने वाले साइबर जालसाजों ने ठगी का नया तरीका ईजाद किया है। जालसाजों के गिरोह में तमाम युवतियां भी शामिल हैं। यह युवतियां सुनियोजित तरीके से लोगों को झांसे में लेती हैं। सिलसिला मिस कॉल से शुरू होगा। रांग नंबर लगने की बात कहकर बताया जाएगा कि सामने कोई महिला बात कर रही है। इसके बाद गैंग के सदस्य अपने शिकार की गतिविधि चेक करेंगे। अगर उसकी तरफ से कॉल नहीं गई तो युवतियों की तरफ से व्हॉट्सएप या फेसबुक पर चैटिंग की शुरूआत की जाएगी। घर, परिवार या पति से परेशान बताकर सहानुभूति बटोरी जाएगी और फिर बातचीत का सिलसिला शुरू हो जाएगा। कुछ दिनों बाद अश्लील वीडियो कॉल कर उसे स्क्रीन रिकॉर्डर एप के जरिये रिकॉर्ड कर लिया जाएगा और फिर उसकेजरिये ब्लैकमेलिंग शुरू कर दी जाएगी।
ऐसे चलता है ब्लैकमेलिंग का सिलसिला
व्हॉट्सप : सबसे पहले गैंग के सदस्य अश्लील वीडियो व्हॉट्सएप पर भेजकर ब्लैकमेल करेंगे और वायरल करने की धमकी देकर मनमानी रकम मांगते हैं।
फर्जी पुलिस : गैंग का कोई सदस्य वीडियो कॉलिंग करने वाली युवती का फर्जी परिजन या फर्जी पुलिस बनकर केस दर्ज करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करता है।
फर्जी यूट्यूब टीम : गैंग के सदस्य अश्लील वीडियो का कुछ हिस्सा यूृट्यूब पर अपलोड करते हैं। उसके बाद यूट्यूब टीम का फर्जी सदस्य बनकर फोन किया जाता है। वीडियो का यूट्यूब लिंक भेजकर केस दर्ज कराने की धमकी देकर रकम मांगी जाती है।
मेवात और दिल्ली हैं ब्लैकमेलर गैंग के केंद्र
साइबर एक्सपर्ट के मुताबिक, बीते कुछ दिनों में वीडियो कॉलिंग से ब्लैकमेलिंग के मामले बढ़े हैं। मोबाइल नंबर और आईपी एड्रेस के जरिये ब्लैकमेलर गैंग के केंद्र मेवात और दिल्ली में सामने आए हैं। इसके अलावा कुछ अन्य सुराग भी मिले हैं, जो गैंग मेवात और दिल्ली में सक्रिय होने की तरफ इशारा करते हैं, लेकिन फर्जी आईडी पर होने के कारण गैंग ट्रेस करने में दिक्कत आ रही है।
ठगी के लिए प्ले स्टोर पर मौजूद हैं दोस्ती की तमाम एप
सोशल मीडिया पर ऐसे तमाम एप के लिंक मौजूद हैं, जिनके जरिये दोस्ती से लेकर शारीरिक संबंधों तक का दावा किया जाता है। प्ले स्टोर पर भी ऐसे एप उपलब्ध हो जाएंगे। इनमें दोस्ती के लिए बकायदा साथी चुनने का विकल्प भी दिया जाता है। किस राज्य और किस शहर के साथ-साथ अपने आसपास मौजूद साथी की डिटेल देने का दावा किया जाता है। एप डाउनलोड करते ही व्हॉट्सएप या फेसबुक मैसेंजर पर मैसेज आने शुरू हो जाते हैं। रजिस्ट्रेशन शुल्क से ठगी की शुरूआत होती है और चैटिंग या कॉलिंग होते ही ब्लैकमेलिंग शुरू कर दी जाती है।
छात्र से लेकर शिक्षक-पुलिसकर्मी तक बन चुके शिकार
केस एक: कविनगर क्षेत्र में रहने वाले एक छात्र के पास अज्ञात नंबर से अश्लील वीडियो कॉल आई। झांसे में आकर उसने भी आपत्तिजनक स्थिति में वीडियो कॉलिंग की। यही वीडियो उसे भेजकर दो लाख रुपये मांगे गए।
केस दो: शहर के एक नामी स्कूल में पढ़ाने वाला शिक्षक भी गैंग का शिकार हो गया। उसके साथ की गई अश्लील चैट का कुछ हिस्सा यूट्यूब पर अपलोड कर कई बार में 70 हजार रुपये वसूल लिए गए। डिमांड जारी रहने पर पीड़ित ने साइबर सेल में शिकायत की।
केस तीन : पड़ोसी जिले में तैनात एक दरोगा भी युवती से दोस्ती के झांसे में आ गया। दरोगा सिहानी गेट थानाक्षेत्र में रहता है। अश्लील वीडियो रिकॉर्ड करके उसे ब्लैकमेल किया जाने लगा। मामला खत्म करने के लिए उसने खाते में 30 हजार रुपये डलवा भी दिए, लेकिन पैसों की डिमांड जारी रही तो उसने साइबर सेल से मदद मांगी।