किसानों का मिलों पर ढाई सौ करोड़ से अधिक का बकाया
गाजियाबाद। लंबे इंतजार के बाद भी गन्ना मूल्य न बढ़ाए जाने से किसानों को झटका लगा है। उधर, गन्ना मिल बीते पेराई सत्र का भी बकाया भुगतान नहीं कर पाए हैं जिससे किसानों में खासी नाराजगी है। मोदी शुगर मिल पर 28 हजार से अधिक किसानों का 258 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। किसानों का कहना है कि नियम के तहत 14 दिन में गन्ना बकाया भुगतान किया जाना चाहिए लेकिन मिल बीते पेराई सत्र का भी कोई भुगतान नहीं कर पाई है। गन्ना बकाया भुगतान बढ़ने के साथ ही किसानों की समस्याएं भी बढ़ती जा रही है।
जिले में एक मात्र गन्ना मिल मोदीनगर में संचालित है, जिससे जिले के साथ ही हापुड़ तक के गांवों का गन्ना भी गिरता है लेकिन मिल समय पर भुगतान नहीं कर पा रही है। गन्ना विभाग से मिले आंकड़े बताते हैं कि पेराई सत्र 2019-20 का मिल पर 122 करोड़ रुपया किसानों को बकाया है। जबकि चालू पेराई सत्र में भी बकाये धनराशि बढ़कर 136 करोड़ रुपये हो गई है। इसके अतिरिक्त ब्याज की धनराशि अलग है। ऐसे में किसानों की दोहरी नाराजगी है। किसानों का तर्क है कि राज्य सरकार ने गन्ना मूल्य में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। ऊपर से बकाया धनराशि का भुगतान भी समय पर नहीं करा पा रही है।
अब भुगतान को लेकर बनेगा दबाव : कीमतों में किसी भी तरह की बढ़ोत्तरी न किए जाने से अब सरकार पर बकाया भुगतान को लेकर दबाव बनेगा। कीमतें न बढ़ाए जाने का असर अब यूपी में किसान आंदोलन को नई दिशा दे सकता है। इससे बड़ी संख्या में किसान आंदोलन से जुड़ेंगे और बकाया भुगतान के लिए सरकार पर आंदोलन के रास्ते दबाव बना सकते हैं। उधर, किसान संगठनों और विपक्ष के लिए गन्ना मूल्य व बकाया भुगतान अब बड़ा मुद्दा बन सकता है।
एडवोकेट अजयवीर चौधरी ने बताया कि सरकार स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की बात करती है लेकिन यहां पर बीते तीन गन्ने पर एक पैसा भी प्रदेश की सरकार ने बढ़ाया नहीं है। उल्टे किसानों को समय पर बकाया भुगतान भी नहीं दिला पा रही है। इससे साफ है कि सरकार किसान हितैषी होने का सिर्फ ढोल पीटती है।