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कैसे होगा विकास जब तिजोरी हो गई खाली

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ghaziabad news
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नगर निगम की तिजोरी अब खाली होने लगी है। आमदनी के नए संसाधन विकसित होने के बावजूद उनका इस्तेमाल न किए जाने और आमदनी से ज्यादा खर्चा करने की वजह से इस साल 31 मार्च के बाद नगर निगम की तिजोरी में सिर्फ 32 करोड़ रुपये बाकी बचेंगे। बीते साल यह रकम 353 करोड़ रुपये थी। बिगड़ी माली हालत को संभालने के लिए नगर निगम अब आमदनी के संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने की बजाय लोगों पर टैक्स बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
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नगर निगम ने बीते साल घाटे का बजट पेश किया है। नगर निगम के 2020-21 के बजट के आंकड़ों के मुताबिक पूरे साल में नगर निगम ने 982 करोड़ रुपये शहर में विकास कार्यों, कर्मचारियों के वेतन, अफसरों के वाहनों के डीजल और साफ-सफाई आदि पर खर्च करने की योजना बनाई थी। इसके सापेक्ष नगर निगम अपने सभी संसाधनों के जरिए सिर्फ 661 करोड़ की आमदनी कर पाएगा। यानी 321 करोड़ रुपये का घाटा इस बार नगर निगम को होगा। इस घाटे की भरपाई वह अपनी तिजोरी में पहले से बचाई गई रकम से करेगा।
पार्षदों को वार्ड कोटा दिया नहीं, फिर भी बढ़ा निर्माण खर्च
कोविड-19 के इस दौर में नगर निगम ने इस साल सभी पार्षदों का वार्ड कोटा खत्म कर दिया। इस साल प्रत्येक वार्ड में सिर्फ 20-20 लाख रुपये खर्च करने का निर्णय जनवरी में हुई बैठक में लिया गया था। बीते साल नगर निगम ने प्रत्येक वार्ड को एक-एक करोड़ का कोटा दिया था। वार्ड कोटे में 80 फीसदी की कटौती के बावजूद नगर निगम ने निर्माण विभाग का बजट हाल ही में पेश किए गए पुनरीक्षित बजट में बढ़ाया है। साल की शुरूआत में निर्माण विभाग को 191 करोड़ रुपये का बजट दिया गया था। वहीं जनवरी में हुई बजट बैठक में इस कोटे को 10 करोड़ रुपये बढ़ाकर 201 करोड़ रुपये कर दिया है।
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आमदनी के संसाधनों का नहीं हो रहा इस्तेमाल
नगर निगम ने करीब 50 करोड़ रुपये खर्च कर रमतेराम रोड पर कॉमर्शियल कांप्लेक्स का निर्माण करीब छह साल पहले पूरा कर लिया था। अभी तक इस कांप्लेक्स की दुकानों को न तो किराए पर दिया गया और न ही लीज पर। नगर निगम को इस कांप्लेक्स को लीज पर देने से करीब 70 से 80 करोड़ रुपये की आमदनी एकमुश्त और करीब पांच लाख रुपये की आमदनी हर माह हो सकती है। इसी तरह नगर निगम की ओर से करीब 40 करोड़ रुपये खर्च करके बनवाया जा रहा ऑडिटोरियम का निर्माण अभी तक पूरा नहीं हुआ है। इस ऑडिटोरियम से भी नगर निगम को हर साल करीब 60 से 70 लाख रुपये की आमदनी हो सकती है। दो तरणताल से नगर निगम को हर साल करीब 50 लाख की आमदनी होती थी। कई साल से नगर निगम इन तरणताल को भी लीज पर नहीं दे रहा है। यही नहीं यूनिपोल का ठेका हर जोन में देकर नगर निगम करीब 50 करोड़ रुपये कमा सकता है।
भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी ने कहा कि आमदनी के संसाधनों को बढ़ाने पर इस बार बजट बैठक में चर्चा करेंगे। निगम अधिकारियों से पूछा जाएगा कि निगम के आमदनी के संसाधनों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा है। लोगों पर टैक्स का बोझ बढ़ाने की बजाय मौजूदा संसाधनों का सही इस्तेमाल करके आमदनी बढ़ाई जा सकती है।
नगरायुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि नगर निगम की आमदनी बढ़ाने के लिए सभी संभावित क्षेत्रों में प्रयास किया जा रहा है। निगम के वार्ड बढ़कर 100 हो गए हैं। निगम पर खर्च का बोझ लगातार बढ़ रहा है। जल्द ही रमतेराम रोड कॉमर्शियल कांप्लेक्स को लीज पर देकर फंड जुटाया जाएगा। इसके प्रयास चल रहे हैं।
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