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64 कर्मचारी काम पर आए नहीं, वेतन की बन गई फाइल

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64 कर्मचारी काम पर आए नहीं, वेतन की बन गई फाइल
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गाजियाबाद। नगर निगम में ‘तेल का खेल’ और हाउस टैक्स में ‘खेल’ के बाद अब निगम के प्रकाश विभाग में कर्मचारियों की तैनाती का ‘खेल’ सामने आया है। निगम के प्रकाश विभाग में 64 कर्मचारियों के वेतन की फाइल तैयार हो गई, लेकिन यह कर्मचारी कहां काम कर रहे हैं यह विभागीय लाइट इंस्पेक्टर्स को ही नहीं पता। इन कर्मचारियों की तैनाती के लिए न तो निगम कार्यकारिणी और न ही बोर्ड से अनुमति ली गई। कागजों में काम कर रहे इन कर्मचारियों की हाजिरी का सत्यापन करने से विभागीय इंस्पेक्टर्स और अवर अभियंता ने भी इंकार कर दिया है।
लॉकडाउन के बाद से नगर निगम में न तो महापौर आशा शर्मा बैठ रही हैं और न ही पार्षदों का ज्यादा हस्तक्षेप रह गया है। करीब पांच माह से नगर निगम की कार्यकारिणी या बोर्ड की बैठक भी नहीं हुई है। अधिकारी अपने स्तर से ही मनचाहे निर्णय ले रहे हैं। करीब दो माह पूर्व नगर निगम के प्रकाश विभाग में 64 कर्मचारियों की तैनाती दर्शायी गई है। इनमें कई लाइट सुपरवाइजरों की तैनाती करना भी बताया गया है। इसके लिए टेंडर जारी किया गया। यह 64 कर्मचारी कहां और किस वार्ड में काम कर रहे हैं यह न तो अधिकांश पार्षदों को पता है, न लाइट इंस्पेक्टर्स को, न प्रकाश विभाग के बाबू को और न ही इस विभाग के जेई को पता है।
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वेतन की फाइल की बनी चकरघिन्नी
कर्मचारियों की तैनाती पर शुरू हुए विवाद के चलते अब इन कथित कर्मचारियों के वेतन की फाइल चकरघिन्नी बनी हुई है। लाइट इंस्पेक्टर्स ने इन कर्मचारियों की तैनाती से अनभिज्ञता जताते हुए अटेंडेंस वेरिफाई करने से इंकार कर दिया है। इसके चलते प्रकाश विभाग के अवर अभियंता ने भी फाइल पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया। हाजिरी सत्यापित न हो पाने से इन कर्मचारियों का वेतन अभी जारी नहीं हो पाया है।
स्पेयर पार्ट्स और लाइटें हैं नहीं, कर्मचारी क्या करेंगे
नगर निगम के प्रकाश विभाग में लॉकडाउन लागू होने के बाद कई माह तक न तो नई लाइटें खरीदीं गईं और न ही एलईडी ड्राइवर व अन्य पार्ट्स। पार्षदों ने जब विरोध शुरू किया तो जुलाई माह में नगरायुक्त ने टेंडर प्रक्रिया पूरी कराकर स्पेयर पार्ट्स खरीदे हैं। ऐसे में पार्षद सवाल उठा रहे हैं कि जब नगर निगम के पास न तो लाइटें थीं और न ही स्पेयर पार्ट्स तो फिर कर्मचारियों की तैनाती क्यों की गई।
कोट
नगर निगम अधिकारियों को अगर कर्मचारियों की तैनाती करनी थी तो एक प्रस्ताव तैयार करके पहले कार्यकारिणी समिति और फिर बोर्ड के समक्ष पेश किया जाता। इसमें बताया जाता कि कितनी अवधि के लिए कांट्रेक्ट पर कर्मचारी रखे जाएंगे, उनके वेतन पर कितना पैसा खर्च किया जाएगा और कितने कर्मचारियों की जरूरत है। इस प्रक्रिया का पालन नहीं करना वित्तीय अनियमितता है। नगरायुक्त से वार्ता करेंगे और शासन से भी जांच की मांग करेंगे। - राजेंद्र त्यागी, भाजपा पार्षद
नगर निगम में कार्यकारिणी समिति और बोर्ड का कोई सम्मान और अस्तित्व बाकी नहीं रह गया। अधिकारी मनमानी पर उतारू हैं। कर्मचारियों की तैनाती से पहले बोर्ड से अनुमति ली जानी चाहिए थी। आगामी बोर्ड बैठक में इस मुद्दे को उठाएंगे और इनके वेतन के लिए बजट में अनुमति नहीं देंगे। - जाकिर सैफी, कांग्रेस पार्षद दल नेता
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अधिकारी बोले
कर्मचारियों की तैनाती के लिए पूर्व में बोर्ड से स्वीकृति ली गई थी। ठेके पर रखे गए सभी 64 कर्मचारी वार्डों में काम कर रहे हैं। मोहन नगर, सिटी और कविनगर जोन के कई वार्डों में इनकी तैनाती की गई है। सारी प्रक्रिया पूरी की गई है। कुछ लोग जानबूझकर विवाद कर रहे हैं। - मनोज प्रभात, अधिशासी अभियंता, प्रकाश विभाग
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