दिल्ली से सटे गाजियाबाद में दरिंदगी की हदें पार करने वाला मामला सामने आया है। यहां सात वर्षीय बच्ची की सामूहिक दरिंदगी के बाद निर्ममता से हत्या कर दी गई। निर्माणाधीन परियोजना पर 20 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। दिन में 15 और रात में पांच गार्ड ड्यूटी पर रहते हैं। मुख्य गेट पर दो सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं।
परिजनों के अनुसार, थाने से लौटने के बाद उन्होंने बच्ची की तलाश शुरू की तो एक गार्ड ने बताया कि उसने बच्ची के रोने और 'मम्मी-मम्मी' पुकारने की आवाज सुनी थी। हालांकि, उसे यह अंदाजा नहीं था कि आवाज बिल्डिंग के अंदर से आ रही है। उस समय वह मोबाइल फोन चलाने में व्यस्त था। इसके बाद परिजन ने इमारत में बच्ची की तलाश शुरू की तो तीसरी मंजिल पर कमरे में खून के निशान मिले। करीब एक घंटे की तलाश के बाद बच्ची का शव मिला।
शाम में हुई लापता, देर रात मिली लाश
कार्यवाहक एसीपी नंदग्राम प्रियाश्री पाल के अनुसार, बिहार के नालंदा जिले का एक परिवार यहां झुग्गी में रहकर मजदूरी करता है। इन दिनों परिवार झुग्गी से कुछ दूर राजनगर एक्सटेंशन स्थित निर्माणाधीन मॉल में काम कर रहा है। शाम करीब साढ़े सात बजे उनकी बेटी लापता हो गई। दो घंटे तक तलाश करने के बाद भी बच्ची नहीं मिली तो उन्होंने नंदग्राम थाने में सूचना दी।
इसके बाद बच्ची के परिजन व अन्य मजदूर उसे तलाशते हुए निर्माणाधीन मॉल में पहुंचे। वहां रात करीब साढ़े 12 बजे बेसमेंट के तीसरे तल पर सीढ़ियों के पास खून से लथपथ शव मिला। शव पर केवल टॉप था, स्कर्ट गायब थी। पुलिस मौके पर पहुंची तो परिजनों ने चार युवकों पर बच्ची का अपहरण कर सामूहिक दुष्कर्म व हत्या का आरोप लगाया।
पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, जिसमें झुग्गी में रहने वाले दो युवक बच्ची को ले जाते दिखाई दिए। बच्ची के हाथ में चिप्स का पैकेट और युवकों के हाथ में शराब व कोल्ड ड्रिंक थी। जांच में सामने आया कि दो आरोपी घटनास्थल पर पहले से मौजूद थे। उनकी तलाश की जा रही है।
पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त लोहे का पाइप, बच्ची के कपड़े और चप्पल बरामद कर लिए हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। डॉग स्क्वॉड और फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं।
भरोसे के रिश्तों में छिपे दरिंदे
जिन चेहरों पर भरोसा कर परिवार अपने बच्चों को सुरक्षित समझते हैं, वही चेहरे कई बार मासूमों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर सामने आ रहे हैं। गाजियाबाद में बीते कुछ महीनों में बच्चों के साथ हुई बर्बर घटनाओं ने न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि समाज में घटते भरोसे की भयावह तस्वीर भी दिखाई है।
लूट, हत्या और अन्य अपराधों के बीच मासूमों को निशाना बनाने वाली घटनाओं में आरोपी अक्सर उनके आसपास रहने वाले परिचित, रिश्तेदार या पड़ोसी निकल रहे हैं। ये आरोपी बच्चों को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाते हैं और फिर जघन्य वारदात को अंजाम देते हैं।
नंदग्राम थाना क्षेत्र में चार माह के भीतर मासूम को अगवा कर हत्या करने की यह दूसरी घटना है। इससे पहले भी जिले में ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें आरोपी पीड़ित परिवार के विश्वास के दायरे में रहने वाले लोग ही थे।
मनोचिकित्सकों के अनुसार बच्चों के प्रति इस तरह की विकृत यौन प्रवृत्ति एक गंभीर मानसिक विकार से जुड़ी हो सकती है। हालांकि, ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई के साथ सामाजिक जागरूकता और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता भी बेहद जरूरी है।
केस-एक
16 मार्च 2026, नंदग्राम थाना क्षेत्र
घर के बाहर खेल रही बच्ची को पड़ोसी युवक बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। सुनसान स्थान पर उसके साथ दरिंदगी की गई। चीखने पर आरोपी ने उसका मुंह दबाकर हत्या कर दी। पीड़ित पिता का आरोप है कि जब बच्ची के पास पहुंचे तो वह जिंदा थी, लेकिन दो अस्पतालों ने उसे भर्ती करने से मना कर दिया। उनका यह भी आरोप है कि पुलिस ने गलत रिपोर्ट भेजी। इंसाफ के लिए पीड़ित ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
केस-दो
15 जनवरी 2025, लिंक रोड थाना क्षेत्र
लिंक रोड थाना क्षेत्र में रहने वाली पांच वर्षीय बच्ची घर से लापता हो गई थी। सीसीटीवी फुटेज में वह अपने चाचा के साथ जाती दिखाई दी। 18 जनवरी को पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान आरोपी चाचा को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपनी भतीजी के साथ दुष्कर्म किया और हत्या के बाद शव बोरे में भरकर औद्योगिक क्षेत्र स्थित नाले में फेंक दिया था।
केस-तीन
11 अप्रैल 2026, टीला मोड़ थाना क्षेत्र
चार वर्षीय बच्ची को उसका मामा आइसक्रीम खिलाने के बहाने घर से ले गया था। आरोप है कि उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद शव को शालीमार गार्डन थाना क्षेत्र में 80 फुटा रोड पर खड़ी कार के नीचे फेंक दिया। आरोपी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। 19 अप्रैल को पुलिस मुठभेड़ में आरोपी मारा गया।
बच्चों के प्रति विकृत सोच गंभीर मानसिक विकार का संकेत
मनोचिकित्सक डॉ. साकेत नाथ तिवारी के अनुसार बच्चों के साथ यौन शोषण करने वाले व्यक्ति की मानसिकता को चिकित्सा विज्ञान में गंभीर विकार माना जाता है। इसे मुख्य रूप से पेडोफिलिक डिसऑर्डर कहा जाता है। इसमें व्यक्ति के भीतर यौवन से पहले के बच्चों के प्रति अनुचित यौन इच्छा और रुझान विकसित हो सकते हैं। मनोचिकित्सा के माध्यम से इसका उपचार संभव है।--डॉ. साकेत नाथ तिवारी, मनोचिकित्सक, एमएमजी अस्पताल