हीमोफीलिया मरीजों के लिए काम करने वाले वकील सागर शर्मा ने कहा कि जरूरतमंद मरीजों को हर 15 दिन पर फैक्टर-7 का इंजेक्शन लगाना जरूरी होता है। इस इंजेक्शन के उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को नोएडा व दिल्ली का चक्कर काटना पड़ता है। गाजियाबाद में ऐसे करीब 35 मरीज हैं, जिनमें ज्यादातर बच्चे हैं।
मेरा 12 साल का बेटा हीमोफीलिया से ग्रसित है। उसे फैक्टर चढ़ाने की अचानक किसी भी समय जरूरत पड़ती है। पंद्रह दिन पहले रात में बेटे को जरूरत पड़ी तो एमएमजी अस्पताल में मना कर दिया गया। इसके बाद नोएडा अस्पताल में गया, वहां भी नहीं मिला तो दिल्ली के लोकनायक अस्पताल में रात ढाई बजे पहुंचा, वहां पर फैक्टर चढ़ाया गया। इस मामले में कई बार शिकायत भी कर चुका हूं। इसके बावजूद व्यवस्था में कोई सुधार नहीं होता है।- किशन लाल, नंदग्राम
मैं स्वयं हीमोफीलिया से ग्रसित हूं। मुझे हमेशा फैक्टर आठ की जरूरत पड़ती है। पिछले बीस साल से जरूरत पड़ रही है लेकिन एमएमजी अस्पताल में जब भी जाओ यह कहकर मना कर दिया जाता है कि फैक्टर नहीं है। वापस दिल्ली या नोएडा जाना पड़ता है। कई बार स्टाफ फैक्टर होने के बावजूद नहीं लगाता है। सबसे अधिक परेशानी इस लॉकडाउन में मुझे हुई। क्योंकि दो बार रात में सवारी ढूंढने में भी परेशानी आई।- सौरभ, खोड़ा
अस्पताल में फैक्टर देने में बहुत अनियमितता की जाती है। नोएडा में एक एनजीओ संचालिका के माध्यम से ब्लड बैंक का स्टाफ फैक्टर देने में लापरवाही करता है। इसकी विस्तृत शिकायत मुख्यमंत्री से की गई है।- सागर शर्मा, अधिवक्ता
जब तक फैक्टर मौजूद रहता है, जो भी मरीज चढ़वाने के लिए आता है उसे चढ़ाया जाता है। अस्पताल में फैक्टर देने में कोई अनियमितता नहीं हुई है। इस समय फैक्टर समाप्त है। शासन में डिमांड भेज दी गई। फैक्टर आते ही चढ़ना शुरू हो जाएगा।- डॉ. अनुराग भार्गव, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक