गाजियाबाद में जिला कारागार में तैनाती के दौरान पैसा लेकर बंदियों को चिकित्सीय परीक्षण में सुविधा देने के आरोप में शासन ने एमएमजी अस्पताल के ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर) को निलंबित कर दिया है। मंगलवार देर शाम उनके निलंबन का आदेश स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के पास पहुंचा। इस प्रकरण की जांच अब मेरठ मंडल के अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को सौंपी गई है।
शासन की ओर से जारी किए गए निलंबन आदेश में कहा गया है कि डॉ. नितिन प्रियदर्शी गरीब बंदियों की परेशानी पर ध्यान नहीं देते थे। उन पर बंदियों से अपशब्दों का इस्तेमाल करने और उनसे मारपीट करने का भी आरोप है। उनके खिलाफ उच्चाधिकारियों के आदेशों का अनुपालन नहीं करने और ड्यूटी से अक्सर बिना बताए अनुपस्थित रहने की शिकायतें भी शासन के पास पहुंची थीं। उनके खिलाफ जांच चल रही थी। जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है।
डॉ. प्रियदर्शी का कहना है कि उन्हें निलंबन की जानकारी नहीं मिली है। विभागीय जांच शुरू किए जाने की सूचना मिली है। वहीं, एमएमजी अस्पताल के सीएमएस डॉ. मनोज चतुर्वेदी ने निलंबन की पुष्टि की है। उनका कहना है कि देर रात उन्हें ई-मेल के जरिए इसकी सूचना मिल गई है।