ऐसे करते थे ठगी
ठगी करने वाले गिरोह के सदस्य सबसे पहले डाटा लेकर अमेरिकी नागरिकों को ई-मेल या कोई लिंक भेजते थे। इस लिंक पर क्लिक करते ही उनके लैपटॉप या कंप्यूटर के कई एप्लीकेशन डिलीट हो जाते थे और कंप्यूटर स्लो हो जाता था। इसके कुछ देर बाद वह वर्चुअल नंबरों से फोन करके संबंधित व्यक्ति को जानकारी देते थे कि उनका कंप्यूटर स्लो हो गया है। इसके बाद वह कंप्यूटर को ठीक करने का झांसा देते थे। अपनी फीस भी तय कर लेते थे। सब कुछ तय हो जाने के बाद रिमोट एप के जरिए उनका कंप्यूटर खुद ऑपरेट करते थे। इस प्रक्रिया में वह डेढ़ से दो घंटे लगा देते थे। उनका कंप्यूटर रिमोट एप के जरिए चलाकर उनकी बैंक खातों की डिटेल आदि जुटा लेते थे और रकम चीन के खाते में ट्रांसफर कर देते थे।
यह सामान हुआ बरामद
ठगी का कॉल सेंटर चलाने वाले इस गैंग के पास से सात लैपटॉप, आठ मोबाइल फोन, वाईफाई राउटर, डोंगल और 26900 रुपये की नकदी मिली है। इन्हीं उपकरणों के जरिये वह इस कॉल सेंटर को संचालित कर रहे थे।
कमीशन की रकम देने कैश लेकर आता था युवक
गिरफ्तार किए गए ठगों ने बताया कि वह दिल्ली के रहने वाले एक युवक के जरिए ठगी के इस धंधे को चला रहे थे। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इसकी एवज में उन्हें ठगी की रकम का 40 फीसदी तक कमीशन मिलता था। ठगी की रकम चीन के बैंक खातों में जाती थी, लेकिन उन्हें कमीशन नकद के रूप में मिलता था। उनका कमीशन देने हर काम अलग-अलग व्यक्ति आता था। उनका कहना है कि वह नहीं जानते की दिल्ली में बैठा व्यक्ति कौन है जो उन्हें निर्देश देता था। उसने खुद का कॉल सेंटर बताया था।