रेड एप्पल और अजनारा ग्रुप के बिल्डरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
गाजियाबाद। रेड एप्पल रेजिडेंसी और अजनारा ग्रुप के बिल्डरों पर नंदग्राम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। दोनों ग्रुप के बिल्डरों पर ठगी का आरोप है। रेड एप्पल ग्रुप के बिल्डर पर इससे पहले भी ठगी के कई मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। बिल्डर पर 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी का आरोप है।
पहला मामला
आवंटी के नाम से फ्लैट पर ले लिया 21 लाख का लोन
मुरादनगर के रहने वाले रियासत अली का कहना है कि राजनगर एक्सटेंशन की रेड एप्पल रेजिडेंसी सोसायटी की छठी मंजिल पर जून 2013 में टू बीएचके फ्लैट बुक कराया था। उन्होंने 3.36 लाख रुपये एडवांस दिया था और 21 लाख रुपये का लोन पास हुआ था। इसके बाद अगस्त 2013 में पीएनबी के साथ अनुबंध हुआ था। बिल्डर ने कहा था कि फ्लैट पर कब्जा मिलने के बाद ही उन्हें किस्त देनी होगी। नौ साल बीत जाने के बाद भी उन्हें फ्लैट नहीं मिला है, लेकिन कुछ दिन पूर्व बैंक से उनके पास नोटिस पहुंचा कि उनकी किस्त जमा नहीं हो रही। जानकारी करने पर पता चला कि बिल्डर ने बैंक अधिकारियों से साठगांठ कर 21 लाख रुपये का लोन उनके फ्लैट पर उनके नाम से ही निकलवा लिया है। उन्होंने बिल्डर प्रतीक जैन, विजयंत जैन, राजकुमार जैन, अक्षय और मुकेश गोस्वामी के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई है। रेड एप्पल सोसायटी के मामले में पुलिस अब तक करीब 110 से ज्यादा एफआईआर दर्ज कर चुकी है। पुलिस
प्रतीक जैन, नमन जैन, रिषभ जैन, अनुशा जैन, इंदु जैन, वीरेंद्र जैन व उमंग जैन समेत कई अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
दूसरा मामला
बैंक में बंधक फ्लैट आवंटी को बेचा, अब होगा नीलाम
बैंक से लोन लेकर बंधक रखे गए फ्लैट को अजनारा ग्रुप के निदेशकों ने धोखाधड़ी कर एक आवंटी को बेच दिया। अब रुपया न लौटाने पर बैंक ने इस फ्लैट समेत कई अन्य फ्लैटों को नीलाम करने की तैयारी कर ली है। वीवीआईपी एड्रेसेज में रहने वाले उत्तम कुमार ने अजनारा ग्रुप के निदेशक अशोक कुमार गुप्ता, प्रमोद कुमार गुप्ता, विनोद कुमार गुप्ता, विनीत कुमार गुप्ता, व कर्मचारी राजदीप सक्सेना, मांधाता सिंह व रोहित डागर के खिलाफ धोखाधड़ी रिपोर्ट दर्ज कराई है।
उत्तम कुमार ने बताया कि 2019 में एक फ्लैट 31 लाख रुपये में बुक कराया था। फ्लैट न मिला तो उन्होंने बिल्डर से शिकायत की। इस पर बिल्डर और उसके कर्मचारियों ने उसे ऑफर दिया कि वह अपने फ्लैट के पास दूसरा बड़ा फ्लैट ले ले। इसका सौदा 38 लाख रुपये में तय हुआ, लेकिन यह फ्लैट भी उन्हें नहीं मिला। इसके बाद बिल्डर ने फिर से पहले फ्लैट को लेने का ऑफर दिया। वह इसके लिए भी राजी हो गए। बिल्डर ने इसकी रजिस्ट्री करा ली। बाद में पता चला कि बैंक ने इस फ्लैट को नीलामी के लिए निकाल रखा है। इस फ्लैट पर बिल्डर ने बैंक से लोन ले रखा है।