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Ghaziabad News: सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली पेट की दवा का सैंपल फेल

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सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली पेट की दवा का सैंपल फेल
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गाजियाबाद। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को दी जाने वाली पेट की दवा रेनिटीडिन का सैंपल जांच में फेल पाया गया है। जांच में गोलियों की कोटिंग खराब मिली हैं और धब्बे मिले हैं। अधोमानक मिलने वाली दवा का सैंपल औषधि प्रशासन के इंस्पेक्टरों ने जून माह में मुरादनगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से लिए थे। जांच में सैंपल फेल होने के बाद औषधि प्रशासन के अधिकारियों ने स्वास्थ्य केंद्र को नोटिस भेजा है, इसकी सूचना सीएमओ को भेजकर दवा के वितरण को रोकने के लिए कहा है।
औषधि प्रशासन विभाग के निरीक्षक आशुतोष मिश्रा ने इसकी पुष्टि की है। उनका कहना है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के फार्मासिस्ट रत्ना गुप्ता की मौजूदगी में 4 जून 2022 को रेनिटीडिन हाईड्रोक्लोराइड दवा (150 एमजी) का सैंपल लेकर जांच के लिए लखनऊ की सरकारी प्रयोगशाला में भेजा गया था। इसकी जांच करके हाल ही में रिपोर्ट गाजियाबाद पहुंची है। जांच में दवा की प्रत्येक गोली पर दोनों ओर काले धब्बे पाए गए। उज्जैन की कंपनी मैसर्स बोकेम हेल्थ केयर प्रा.लि. की ओर से आपूर्ति की जाने वाली इस दवा की गोली के ऊपर की जाने वाली कोटिंग भी खराब मिली। उन्होंने बताया कि जांच में दवा को अधोमानक पाया गया है। इनके अलावा लोनी और मोदीनगर से लिए गए दो अन्य दवाओं के नमूने भी जांच में फेल पाए गए हैं। इनकी रिपोर्ट मिलने पर दवा कंपनी पर कार्रवाई की जाएगी।
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सिक्किम में बनी एंटी बायोटिक दवा नकली पायी गई
औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने लोनी के एक मेडिकल स्टोर से क्रीसेफ-200 नाम की एक एंटीबायोटिक दवा का नमूना लेकर जांच के लिए भेजा था। जांच में यह दवा नकली पाई गई। औषधि निरीक्षक आशुतोष मिश्रा का कहना है कि बीते साल 23 नवंबर को आरएस डिस्ट्रीब्यूटर्स स्टोर से इस दवा का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा था। उन्होंने बताया कि दवा में वह सॉल्ट नहीं मिले, जिनका दावा किया गया है। उन्होंने बताया कि दवा के पैकेट पर कंपनी का नाम सौम्या फार्मा गंगटोक, सिक्किम लिखा हुआ है। पता कराया गया तो इस पते पर दवा की कोई कंपनी ही नहीं मिली। इसके बाद अब अधिकृत रूप से कंपनी को नोटिस भेजा जाएगा। मोदीनगर में शशी रानी के कैरव मेडिकोज से इसी साल आठ मई को जांच के लिए भेजा गया रेबीप्रोजोल कैप्सूल का नमूना भी अधोमानक पाया गया है। यह दवा सोलन, हिमाचल प्रदेश की कंपनी एडल बायोटेक की ओर से बनाई जा रही है।
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पहले भी पकड़ी जा चुकी नकली दवा
औषधि प्रशासन विभाग की ओर से गाजियाबाद में नकली दवा पहले भी पकड़ी जा चुकी है। बीते माह दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के साथ गाजियाबाद के ड्रग इंस्पेक्टरों ने ट्रॉनिका सिटी में कैंसर की नकली दवा का जखीरा बरामद किया था। यह नकली दवा एक एमबीबीएस डॉक्टर और इंजीनियर की टीम आपूर्ति कर रही थी। विभाग की ओर से 10 नवंबर को डासना में पांच लाख की नकली दवा बरामद कर एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था। 18 नवंबर को साहिबाबाद में पशुओं को दी जाने वाली नकली दवा बरामद की गई थी। इससे पहले 8 सितंबर को राजनगर एक्सटेंशन से ओरोफर के 497 इंजेक्शन सील कर जांच कराई गई थी। यह इंजेक्शन भी नकली थे।
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