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Ghaziabad News: मजिस्ट्रेट के पास नहीं जाना होगा कार्यक्रम की अनुमति के लिए

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मजिस्ट्रेट के पास नहीं जाना होगा कार्यक्रम की अनुमति के लिए
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गाजियाबाद। गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नरेट बन जाने पर लोगों के किसी भी कार्यक्रम की अनुमति के लिए अब मजिस्ट्रेट के पास नहीं जाना होगा। पुरानी व्यवस्था में सार्वजनिक स्थान पर रैली, जुलूस और धार्मिक आयोजन की अनुमति के लिए सिटी मजिस्ट्रेट के पास जाना पड़ता था। देहात में एसडीएम अनुमति देते थे। पुलिस, अग्निश्मन विभाग की रिपोर्ट लग जाने के बाद अनुमति पर निर्णय किया जाता था। ऐसे में लोगों को कई जगह चक्कर काटने पड़ते थे। अब अनुमति पुलिस ही देगी और भी कई व्यवस्था बदल जाएंगी।
पटाखों के लाइसेंस पुलिस कमिश्नर जारी करेंगे। विस्फोटक पदार्थ रखने के लिए लाइसेंस भी पुलिस कमिश्नर से मिलेगी। अग्निश्मन का अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) डीएम से नहीं मिलेगा। इसे भी पुलिस कमिश्नर जारी करेंगे। इन लाइसेंस के मिलने में भागदौड़ कम होगी। समय भी बचेगा। फाइल अलग-अलग महकमे में नहीं जाएगी। पहले पुलिस की रिपोर्ट लगने के बाद संबंधित महकमे में जाती थी। अब सब कुछ पुलिस ही करेगी।
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धारा 144 (निषेधाज्ञा)
पुरानी व्यवस्था : इसे डीएम लागू करते थे। पुलिस रिपोर्ट के आधार पर इसे लागू किया जाता था।
नई व्यवस्था : पुलिस कश्निर ही इसे लागू कर सकेंगे। पुलिस को इसके लिए मजिस्ट्रेट के पास फाइल नहीं भेजनी होगी।
धारा - 151 (शांति भंग)
पुरानी व्यवस्था : झगड़ों के मामलों में पुलिस केस दर्ज कर फाइल मजिस्ट्रेट के पास भेजती थी। मजिस्ट्रेट कार्रवाई तय करते थे।
नई व्यवस्था : पुलिस सीधे कार्रवाई पर निर्णय लेगी। फाइल को मजिस्ट्रेट के पास नहीं भेजा जाएगा।
107-116 (मुचलका)
पुरानी व्यवस्था : पुलिस इसकी रिपोर्ट मजिस्ट्रेट के पास भेजती थी। कार्रवाई रस्मी बनकर रह गई थी। सिर्फ फाइल बनती थी, पाबंद किए लोगों के शर्तों का उल्लंघन करने पर उनसे मुचलका राशि नहीं वसूली जाती थी।
नई व्यवस्था : अब पुलिस खुद निर्णय लेगी। जिसे मुचलका पाबंद किया गया है, अगर उसने इसकी शर्तों का उल्लंघन किया तो उससे उतनी राशि वसूली जा सकती है जितनी में उसे पाबंद किया गया है।
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बल प्रयोग
पुरानी व्यवस्था : कानून-व्यवस्था के बिगड़ने की स्थिति में मजिस्ट्रेट की अनुमति मिलने पर पुलिस बल प्रयोग कर सकती थी। कई बार अनुमति नहीं मिलती थी। फिर भी पुलिस बल प्रयोग करती थी और फंस जाती थी।
नई व्यवस्था : अब पुलिस को किसी और से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। पुलिस कमिश्नर के पास ही मजिस्ट्रेट के अधिकार भी हैं।
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