66 साल पुराने एमएमजी अस्पताल की जर्जर इमारत होगी ध्वस्त
गाजियाबाद। 66 साल पुराने एमएमजी अस्पताल की मुख्य इमारत और पुराने आवासीय परिसर केध्वस्तीकरण के बारे में शासन ने फिर से स्वास्थ्य विभाग से जवाब मांगा है। शासन स्तर से प्रदेश भर के जर्जर अस्पतालों की सूची तैयार की गई है, जिसमें एमएमजी अस्पताल भी शामिल है। जर्जर भवन के ध्वस्तीकरण के बाद इसका संचालन कैसे होगा इसकी भी जानकारी मांगी गई है।
एमएमजी अस्पताल को चार साल पहले ही विशेषज्ञों ने असुरक्षित घोषित कर दिया था लेकिन आज भी उसी इमारत में मरीजों का इलाज किया जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता विष्णु गुप्ता ने इस मामले में जून में मानवाधिकार आयोग में याचिका भी डाली थी। जिसमें भवन के खतरनाक स्थिति के अलावा चिकित्सकों स्टाफ को अन्य जगह भेजने और भवन के ध्वस्त करने की योजना के बारे में पूछा गया है। शासन ने 22 नवंबर को दोबारा अस्पताल के ध्वस्तीकरण के बाद उसका संचालन कैसे होगा इसके बारे में जवाब मांगे हैं। इसके जवाब में एमएमजी के सीएमएस डॉ. मनोज चतुर्वेदी ने जानकारी दी है कि सबसे पहले परिसर में स्थित आवासीय भवनों को ध्वस्त कराया जाए। उस स्थान से मुख्य भवन का निर्माण शुरू हो जब निर्माण पूरा हो जाए तो उस भवन में अस्पताल संचालित किया जाएगा उसके बाद दूसरे चरण का निर्माण शुरू किया जाए। जनसंख्या के अनुसार 300 बेड के अस्पताल बनाने का सुझाव दिया गया है।
अस्पताल के मुख्य भवन का निर्माण 1956 में हुआ था। इमारत के निर्माण में भूकंप रोधी तकनीक का प्रयोग नहीं किया गया है। अस्पताल परिसर में ही 1978 में दो मंजिला आवासीय परिसर का भी निर्माण हुआ था जो अब बेहद खतरनाक स्थिति में है, जो कभी भी गिर सकती है। सीएमएस डॉ. मनोज चतुर्वेदी ने बताया कि इसके बारे में पहले शासन को कई बार पत्र लिखा गया है। शासन से जो सुझाव मांगे गए थे वह भी भेज दिया गया है।
ये अस्पताल होंगे ध्वस्त
जिला चिकित्सालय आगरा, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उसका बाजार जनपद सिद्धार्थनगर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिराथू जनपद कौशांबी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बंगरा, बबीना, मोठ एवं बामौर तथा गुरसराय जनपद. झांसी, एमएमजी चिकित्सालय गाजियाबाद, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीकापुर जनपद अयोध्या एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भदैया और लंभुआ जनपद सुल्तानपुर के ध्वस्तीकरण के आदेश दिए गए हैं।