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उम्र में 18 साल बड़ा था चंद्रवीर, पसंद नहीं करती थी सविता

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उम्र में 18 साल बड़ा था चंद्रवीर, पसंद नहीं करती थी सविता
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गाजियाबाद। नंदग्राम के गांव सिकरोड़ के चंद्रवीर उर्फ पप्पू की 28 सितंबर 2018 को की गई हत्या की एक और वजह सामने आई है। वह पत्नी सविता से उम्र में 18 साल बड़े थे। इसलिए, सविता उन्हें पसंद नहीं करती थी। शादी के बाद से ही दोनों में अनबन रहने लगी। इसका पता चंद्रवीर के चचेरे भाई अरुण को चला तो वह हमदर्दी जताकर सविता के करीब आ गया और दोनों में प्रेम संबंध हो गए। फिर दोनों ने मिलकर चंद्रवीर की हत्या कर दी। जेल जाने से पूर्व की गई पूछताछ में सविता ने पुलिस को विस्तार से पूरी कहानी बताई।
क्राइम ब्रांच प्रभारी अब्दुर रहमान सिद्दीकी ने बताया, सविता का मायका ग्वालियर में है। उसकी पहली शादी ग्वालियर में मोहन सिंह से हुई थी। पति ने छोड़ दिया था। इसके बाद 2004 में चंद्रवीर से शादी हुई। उस वक्त सविता की उम्र 28 साल थी और चंद्रवीर की 46 थी। चंद्रवीर की यह पहली शादी थी। सविता ने पुलिस को बताया, 18 साल बड़े चंद्रवीर से शादी कर तो ली, लेकिन वह ज्यादा उम्र की वजह से पसंद नहीं था। पसंद न आने की एक वजह चंद्रवीर की शराब पीने की आदत भी थी। उनके तीन बच्चे हुए। दो बेटी और एक बेटा।
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चंद्रवीर के चचेरे भाई अरुण ने बताया कि भाई (चंद्रवीर) और भाभी (सविता) के बीच अनबन का उसे पता चला। उसने सविता से हमदर्दी जताई। इससे दोनों के बीच नजदीकी बन गई जो धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। सविता को अकेला देखकर वह उससे मिलने चला जाता था। एक दिन चंद्रवीर अचानक घर लौट आया और उन दोनों को साथ देख लिया। उसने उसे घर से भगा दिया और धमकी दी कि फिर से कभी आया तो उसे छोड़ेगा नहीं। इसके बाद वह शराब पीकर आता और सविता पर गुस्सा उतारता। उसे कई बार बुरी तरह से पीटा। तब दोनों ने मिलकर तय किया कि उसकी हत्या करनी है।
चार महीने पहले रची थी साजिश : अरुण और सविता ने बताया कि जुलाई 2018 में चंद्रवीर की हत्या करने की साजिश रच ली थी। पहले तय किया था कि जहर देकर मारेंगे और लाश को रात में कहीं फेंक आएंगे। इसमें पकड़े जाने का डर था, इसलिए साजिश में बदलाव किया। फिर दोनों ने बैठकर नई साजिश तैयार की। इसमें हत्या तमंचे से गोली मारकर करनी थी। ऐसा ही किया। लाश को ठिकाने लगाने का इंतजाम भी पहले ही कर लिया गया। अरुण ने बताया कि उसने माता-पिता को मेरठ स्थित अपने दूसरे मकान पर भेज दिया। वह गांव के घर में अकेला रह गया। इसलिए, गड्ढा खोदकर शव को आसानी से दबा पाया।
बदबू फैलने के डर से बांधे पशु
अरुण ने बताया कि उसने छह फुट गहरा गड्ढा खोदकर चंद्रवीर की लाश को उसमें दबा दिया। इसके बाद भी उसे डर था कि कहीं बदबू न फैल जाए। वहां सीमेंट का फर्श करा दिया था। इसके बाद उसी कमरे में पशु बांधने लगा ताकि लाश की बदबू आए भी तो गोबर की बदबू के कारण बाहर न जाए। साजिश के तहत ही हत्या के वक्त सविता बाल्टी लेकर तैयार थी। पुलिस ने बताया, जैसे ही अरुण ने चारपाई पर लेटे चंद्रवीर को गोली मारी और वैसे ही सविता ने बाल्टी लगा दी और खून उसमें भर लिया। साफ करके वह इस बाल्टी को बाथरूम में इस्तेमाल करती थी। तमंचे को अरुण ने बोरी में रखकर छिपा दिया था।
मां की हरकतों से गहराया बेटी का शक
चंद्रवीर की बेटी को पहले से मां सविता और चाचा अरुण पर शक था। उसने दोनों को चोरी छिपे मुलाकात करते देख लिया था। चंद्रवीर की हत्या के कुछ दिन बाद दोनों को पकड़े जाने का डर नहीं रहा। अरुण रोज रात को मिलने के लिए आने लगा। 17 साल की बेटी ने बताया कि उसने एक दिन रात के समय दोनों को देख लिया था। चाचा के रोज रात को आने से उसे शक हो गया। उसने मां से कहा कि चाचा का इस तरह आना उसे अच्छा नहीं लगता। इस पर मां ने पीट दिया था। इससे उसका शक और गहरा गया। पुलिस ने पूछा तो उसने सच बता दिया।
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यह था मामला : चंद्रवीर की हत्या में पुलिस ने सोमवार को पत्नी सविता और चचेरे भाई अरुण को गिरफ्तार किया। दोनों ने हत्या चार साल पहले की थी। चंद्रवीर के भाई भूरे ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसकी फाइल पुलिस बंद कर चुकी थी। एसएसपी ने कुछ दिन पहले अनसुलझे मामलों की फाइल खुलवाकर जांच कराई तो इसका राज खुला।
कत्ल की रात (28 सितंबर 2018)
आठ बजे : चंद्रवीर शराब पीकर आया, पत्नी से खाना देने के लिए कहा।
दस बजे : चंद्रवीर अपने कमरे में सोने के लिए चला गया, चारपाई पर लेटा।
10:30 बजे : रोज की तरह चंद्रवीर की दोनों बेटियां दूसरे मकान पर सोने के लिए गईं।
11 बजे : सविता ने फोन करके देवर अरुण से कहा, जल्दी से आ जाओ।
11:05 बजे : अरुण आ गया, सविता के साथ चंद्रवीर के कमरे में दाखिल हुआ।
11:10 बजे : अरुण ने तमंचे से गोली मारी, सविता ने बाल्टी में खून जमा किया।
एक बजे : चंद्रवीर के हाथ में उसका नाम लिखा कड़ा देख अरुण ने हाथ काट दिया।
डेढ़ बजे : चादर में लपेटकर अरुण चंद्रवीर को शव को अपने घर में ले गया।
ढाई बजे : चंद्रवीर के कटे हाथ को ले जाकर अरुण केमिकल फैक्टरी के पास फेंक आया।
(आरोपियों से पूछताछ के आधार पर जैसा पुलिस ने बताया)
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