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पैसे के लिए रिश्तों का खून : भतीजे ने बुआ, बेटे ने ली मां की जान

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पैसे के लिए रिश्तों का खून : भतीजे ने बुआ, बेटे ने ली मां की जान
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मोदीनगर। गांव हृदयपुर भंडौला में अनीसा (65) और सीकरी कलां में सरोज (55) की हत्या के रहस्य से पर्दा उठा तो अपनों के ही हाथ खून से रंगे मिले। दोनों वारदात में खून के रिश्तों में यह खूनम-खून पैसों के लिए किया गया। पुलिस ने दोनों के आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। अनीसा की हत्या के खुलासे से छह बेकुसूर लोग जेल जाने से बच गए। एफआईआर में उनको नामजद कराया गया था। सरोज की हत्या में भी शुरूमें शक की सुईं निर्दोष लोगों पर घूमी, लेकिन सीसीटीवी फुटेज से मिले सुराग ने पुलिस को सही रास्ता दिखा दिया। संवाद
ऑटो खरीदने के लिए रकम न देने पर की थी अनीसा की हत्या
पुरानी रंजिश में पड़ोसियों को करा दिया था नामजद
भोजपुर के चुड़ियाला चौकी क्षेत्र स्थित हृदयपुर भंडौला गांव में 11 नवंबर की रात की गई 65 वर्षीय अनीसा की हत्या उसी के बेटे जाविद उर्फ गुल्लू ने ऑटो के लिए रकम नहीं देने पर की थी। पुलिस ने मंगलवार को इसका खुलासा करते आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल प्लास्टिक की रस्सी, चुन्नी और अन्य सामान बरामद हुआ है।
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एसपी देहात डॉ. ईरज राजा ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अनीसा का गला दबाकर हत्या करने की बात सामने आई थी। उनकी बेटी आसमीन ने पुरानी रजिंश के कारण पड़ोसी मोमीन, जावेद, शाहबुद्दीन, शहजाद, नफीसुद्दीन और सोमीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच-पड़ताल के दौरान जाविद ने अलग-अलग बयान दिए। इससे उस पर शक हो गया। वह नामजद आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी पर जोर दे रहा था। इस बीच कई लोगों से पता चला कि वह मां से ऑटो खरीदने के लिए रकम देने की जिद कर रहा था। उससे सख्ती से पूछताछ हुई तो उसने सच उगल दिया।
पूछताछ में उसने बताया, मां के पास रकम नहीं थी। उसने जमीन बेचकर रकम देने के लिए कहा था। मां ने जमीन बेचने से मना कर दिया था। इस पर उसने मां को भला-बुरा कहा था। इस पर मां ने जमीन को बेटी आसमीन के नाम करने की बात कही। उसने बेटी को ससुराल से बुला भी लिया। इस पर मां की हत्या की साजिश रच डाली।
खेत में फेंक आया था शव
अनीसा के पांच पुत्र तथा एक पुत्री है। सभी विवाहित है। चार बेटे परिवार के साथ अलग रहते हैं। जाविद मां के साथ रहता था। जमीन नाम करने के लिए अनीसा ने आसमीन से बात की। इसके बाद 11 नवंबर को उसे बस स्टैंड तक छोड़ने के बाद घर आकर चारपाई पर लेट गई। पुलिस ने बताया कि जाविद ने मौका देखकर चुन्नी से गला घोंटकर मां की हत्या कर दी और शव को रजाई में छिपाकर रख दिया। लोगों को गुमराह करने के लिए मां के लापता होने बात की। रात होने पर शव कंधे पर रखकर खेत में फेंक आया था। अगले दिन शुक्रवार मां को तलाश करने का नाटक करने लगा।
50 लाख रुपये की लूट के लिए गला घोंटकर मारा सरोज को
दिल्ली-मेरठ मार्ग पर गांव सीकरी कलां में 13 अक्टूबर को सरोज शर्मा की हत्या उसी के नाबालिग भतीजे ने 50 लाख की लूट के इरादे से की थी। वह अपने चार साथियों के साथ लूट करने बुआ के घर पहुंचा था। पुलिस ने नाबालिग भतीजे सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। दो फरार हैं।
एसपी देहात ने बताया कि सरोज की हत्या में बागपत के बड़ौत निवासी उसके भाई के नाबालिग पुत्र तथा मनीष और दीपक को गिरफ्तार किया गया है। हत्याकांड में दो अन्य आरोपी बिट्टू व सचिन भी शामिल थे। आठ अक्तूबर को सरोज बड़ौत स्थित अपने मायके गई थी। वहां भतीजे के सामने 50 लाख रुपये का प्लॉट खरीदने की चर्चा की थी। भतीजे को लगा कि बुआ के पास मोटी रकम है। इस पर भतीजे ने गांव के ही दोस्त मनीष के साथ बुआ के घर लूट की साजिश रची। सभी ने 13 अक्तूबर को रात करीब 12 बजे धावा बोला। दीवार फांदकर चार घर में दाखिल हो गए। एक बाइक लेकर घर से कुछ दूर खड़ा रहा। दरवाजे में पत्थर मारा, शोर होने पर जैसे ही सरोज कमरे से बाहर आईं तो साड़ी से गला घोंटकर हत्या कर दी। हत्या से पहले सरोज ने आरोपियों से संघर्ष भी किया था लेकिन वह अकेली चार आरोपियों का मुकाबला नहीं कर सकीं। हत्या के बाद आरोपियों ने घर खंगाला, लेकिन वहां रकम नहीं मिली। वे वहां से सरोज शर्मा की अंगूठी लूटकर फरार हो गए। रिपोर्ट इकलौते पुत्र सियानंद ने दर्ज कराई।
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जिसकी परवरिश की, उसने ही जान ली
संपत्ति विवाद को लेकर पुत्र सियानंद भी शक के घेरे में था। वह मां से अलग मोदीनगर में रहता है। घटना वाले दिन सियानंद का ढाई वर्ष पुत्र कालू भी दादी सरोज के साथ था। समय बीतने के साथ हत्या की गुत्थी उलझती गई। इसी बीच पुलिस को घटना वाली रात की एक सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में कई संदिग्धों की आवाजाही दिखी। जांच बढ़ी तो एक मोबाइल नंबर हाथ लग गया। इसी से सुराग मिला। पिता की हत्या के बाद नाबालिग आरोपी की मां उसे तथा उसके बड़े भाई को छोड़कर किसी के साथ चली गई थी। इसके बाद बुआ सरोज शर्मा ही नाबालिग भतीजे और उसके बड़े भाई की परवरिश कर रही थी। पैसे के लालच में भतीजे ने उसी बुआ की जान ले ली, जो उसे पाल रही थी।
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