डीएनए परीक्षण होगा
एसपी क्राइम डॉ. दीक्षा शर्मा ने बताया कि अरुण, सविता को गिरफ्तार कर उनकी निशानदेही पर वारदात में प्रयुक्त तमंचा, कुल्हाड़ी, बाल्टी बरामद कर लिए गए हैं। कंकाल का डीएनए परीक्षण कराया जाएगा
केस दर्ज कराने वाले की हो चुकी हत्या
चंद्रवीर की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने वाले उनके भाई भूरे की हत्या हो चुकी है। इसके आरोप में उनका बेटा जेल गया। हत्या के पीछे संपत्ति का विवाद सामने आया था। भूरे की मौत के बाद चंद्रवीर की गुमशुदगी के मामले में किसी ने पुलिस में पैरवी नहीं की।
गोली मारकर हत्या, बाल्टी में भरा खून, कुल्हाड़ी से काट अलग कर दिया हाथ
सविता और अरुण ने पुलिस पूछताछ में पूरा घटनाक्रम बताया है। पहले पूरी साजिश रची गई। 18 सितंबर 2018 की रात को कत्ल करना तय हुआ। चंद्रवीर सो रहे थे। देर रात अरुण आया। सविता ने दरवाजा खोल दिया। अरुण ने सिर में गोली मारकर चंद्रवीर की हत्या की। सविता पहले से बाल्टी लिए खड़ी थी। सिर से निकला खून बाल्टी में भर लिया ताकि फर्श पर न गिरे। इसके बाद दोनों ने बाहर जाकर देखा कि गोली चलने की आवाज से लोग जाग तो नहीं गए हैं, लेकिन वहां कोई नहीं था।
दोनों शव को उठाकर ले गए। इसे अरुण के घर में रखा गया। अरुण ने चार दिन तक गड्ढा खोदा। शव के पास धूपबत्ती और अगरबत्ती जलाता रहा ताकि बाहर बदबू न जाए। गड्ढा छह फुट गहरा हो जाने पर रात के अंधेरे में सविता के साथ मिलकर शव को उसमें दबा दिया। इससे पहले शव के गड्ढे में रखते समय सविता की नजर चंद्रवीर के चांदी के कड़े पर पड़ी। इस पर चंद्रवीर का नाम लिखा था। अरुण ने कहा कि अगर कभी भी राज खुला और पुलिस ने गड्ढा खोदकर शव निकाला तो कड़े से पहचान हो जाएगी।
इसलिए, अरुण ने कुल्हाड़ी से कड़े वाला हाथ ही काटकर अलग कर दिया। इसे पास की केमिकल फैक्टरी के पास गड्ढा खोदकर दबा दिया था। साजिश के तहत अरुण वारदात से पहले मां-बाप को मेरठ स्थित अपने मकान में छोड़ आया था। उसने पूछताछ में बताया कि पहले चंद्रवीर को जहर देकर मारने की साजिश थी, लेकिन इसमें पकड़े जाने का जोखिम ज्यादा था क्योंकि वह तुरंत ही नहीं मरता। इसलिए, गोली मारकर हत्या करना तय हुआ।