डॉक्टर नहीं लिख रहे जेनरिक दवा, छह महीने में बंद हो गए 10 जन औषधि केंद्र
गाजियाबाद। लोगों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए जन औषधि केंद्र खोले गए थे, लेकिन डॉक्टरों के पर्चे पर जेनरिक दवाएं न लिखने की वजह से इन पर ग्राहक नहीं पहुंच रहे हैं। घाटे में जा रहे लोग अब इन जन औषधि केंद्रों को बंद करने लगे हैं। गाजियाबाद में 10 जन औषधि केंद्र बंद हो चुके हैं।
मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी जिलों में जन औषधि केंद्र खुलवाए थे। इन दुकानों पर मिलने वाली दवाएं प्राइवेट कंपनियों की ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 90 फीसदी तक सस्ती हैं। जन औषधि केंद्रों पर तकरीबन 250 तरह की दवाएं उपलब्ध कराई गई थीं, जिनमें कैंसर तक की दवा उपलब्ध हैं। शुरूआत में लोगों का रुझान इनकी तरफ बढ़ा, लेकिन प्राइवेट डॉक्टरों ने जेनरिक दवाएं मरीजों के पर्चे पर लिखी ही नहीं। इसकी वजह से धीरे-धीरे यह जन औषधि केंद्र बंद होने लगे। अब तक 10 जन औषधि केंद्र बंद हो चुके हैं। इनमें करीब ढाई माह पहले बंद हुआ संयुक्त जिला अस्पताल का जन औषधि केंद्र भी शामिल है। इसके संचालक अमित का कहना है कि सरकारी अस्पताल में दवाएं मुफ्त मिलती हैं और प्राइवेट डॉक्टर मरीजों के पर्चे पर ब्रांडेड दवा लिखते हैं। ऐसी स्थिति में दवाओं की बिक्री नहीं हो रही थी।
ब्रांडेड दवा बेची तो अफसरों ने सील कर दिए केंद्र
जेनरिक दवाओं की बिक्री न होने पर जन औषधि केंद्रों के संचालकों ने ब्रांडेड दवा बेचनी शुरू कर दी। हालांकि यह अपराध नहीं है, लेकिन उनके अनुबंध में इसकी इजाजत नहीं है। ब्रांडेड दवा बेचने की शिकायत पर अफसरों ने जांच की और चार केंद्रों को सील कर दिया था। यानी जेनरिक दवाओं को खरीदार नहीं मिल रहे और जिन दवाओं के खरीदार उपलब्ध हैं, उन्हें जन औषधि केंद्र संचालक बेच नहीं सकते।
डॉक्टर वापस करा देते हैं जेनरिक दवाएं
अपने जन औषधि केंद्र को बंद कर चुके अमित कुमार का कहना है कि अगर कोई मरीज डॉक्टर की मर्जी के बगैर जेनरिक दवाएं ले भी जाता था तो डॉक्टर उन्हें वापस करा देते थे। उन्हें कहा जाता था कि यह दवाएं असर नहीं करेंगी। इसके बाद धीरे-धीरे लोगों का विश्वास भी उठ गया।
जन औषधि केंद्र संचालकों ने कई स्थानों पर स्टोर बंद किए हैं। कुछ स्थानों पर ऐसे केंद्रों पर ब्रांडेड दवा मिलने के कारण उन्हें सील किया गया था। ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है कि डॉक्टर किसी विशेष कंपनी की दवा पर्चे पर लिखे। जन औषधि केंद्र संचालक केंद्र को बंद करने की सूचना नहीं देते हैं। - अनुरोध कुमार, ड्रग इंस्पेक्टर