ओपीडी में तीन दिन में बढ़े सांस के रोगी
गाजियाबाद। प्रदूषण की वजह से लोगों को सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन आदि की समस्या आने लगी है। तीन दिनों में अस्पतालों में अधिकतर मरीज सांस लेने में तकलीफ की शिकायत लेकर आए। दिवाली से पहले जहां ओपीडी में 100 संास रोगी आते थे वहीं अब पुराने और नए रोगियों को मिलाकर एक दिन में 200 के करीब मरीज पहुंच रहे हैं। इसके अलावा सॉर थ्रोट और सर्दी-खांसी वाले मरीज भी पहुंच रहे हैं।
वातावरण में घुला पटाखों का धुआं और गैस की वजह से पुराने दमा केरोगियों और ब्रान्काटिस के मरीजों की परेशानी पहले से काफी बढ़ गई है। एमएमजी अस्पताल केवरिष्ठ फिजिशियन आरपी सिंह ने बताया कि प्रदूषण स्तर बढ़ने के साथ और मौसम में बदलाव के बाद दमा के रोगियों और ब्रांकाइटिस के मरीजों को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। सीएमएस डॉ. मनोज चतुर्वेदी ने बताया कि अस्पताल के जिरिएटिक ओपीडी में सबसे अधिक बुजुर्ग सांस लेने में तकलीफ और खांसी की समस्या लेकर आ रहे हैं। इसके अलावा आई स्पेशलिस्ट के पास आंखों में जलन और आंखों से पानी आने की समस्या भी मरीजों में अधिक देखी जा रही है।
संयुक्त जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. विनोद चंद्र पांडेय ने बताया कि दिवाली के बाद से सबसे अधिक सांस रोगियों की संख्या बढ़ी है। लोगों को सलाह दी जा रही है कि घर से बाहर निकलते समय मास्क प्रयोग करें।
तिथि अस्पताल कुल ओपीडी सांस रोगी
25 अक्तूबर एमएमजी 1137 220
25 अक्तूबर संयुक्त 667 120
26 अक्तूबर एमएमजी 1035 201
26 अक्तूबर संयुक्त 650 105
27 अक्तूबर एमएमजी 1203 236
27 अक्तूबर संयुक्त 617 112
नर्वस सिस्टम भी होता है प्रभावित
फिजिशयन डॉ अंशुल वार्ष्णेय ने बताया कि प्रदूषण से केवल फेफड़े और दिल ही नहीं शरीर का प्रत्येक अंग प्रभावित होता है। प्रदूषण के कारण बाल, आंख, गला, लीवर आदि सभी प्रभावित होते हैं। इसके अलावा सिर दर्द की समस्या होती और नर्वस सिस्टम भी प्रभावित होता है। स्मॉग में मौजूद हानिकारक तत्व सांस के जरिए हमारे शरीर में जाते हैं और आंतों में पहुंचते हैं। जहां से ये विषैले तत्व खून में शामिल होकर पूरे शरीर को रोगी बना सकते हैं।
यह करें बचाव
- सुबह सैर पर खाली पेट ना जाएं
- घर के आसपास धूल हो तो पानी का छिड़काव करें
- हो सके तो घर में ही व्यायाम करें
- धूम्रपान न करें।
- दिक्कत होने पर तत्काल चिकित्सक को दिखाएं
- नियमित रूप से श्वसन संबंधी व्यायाम करें।
- ड्राइविंग के समय कार के शीशे बंद रखें।