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राजमिस्त्री ने किशोरी से किया दुष्कर्म, 10 साल कारावास

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राजमिस्त्री ने किशोरी से किया दुष्कर्म, 10 साल कारावास
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गाजियाबाद। सात वर्ष पूर्व किशोरी से दुष्कर्म करने वाले राजमिस्त्री को पाक्सो कोर्ट ने 10 वर्ष कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश ईश्वर सिंह ने दोषी पर 32 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। दोषी द्वारा जमा की गई धनराशि पीड़िता को दिया जाएगा। इसके अलावा क्षतिपूर्ति के रूप में प्रदेश सरकार द्वारा एक लाख रुपये दिए जाने का भी आदेश दिया। किशोरी ने अदालत में बयान दर्ज कराया था कि राजमिस्त्री के साथ वह निकाह कर चुकी है। निकाह के बाद जिस तरह से पति-पत्नी रहते हैं, उसी तरह से ससुराल में रह रही थी, लेकिन पुलिस जबरदस्ती उसे ससुराल से उठाकर लाई थी।
विशेष लोक अभियोजक उत्कर्ष वत्स ने बताया कि लिंक रोड थाने में 13 मार्च 2013 को किशोरी के पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें आरोप लगाया था कि उनकी बेटी राजमिस्त्री के साथ बेलदारी का काम करती थी। कुछ समय बाद वह बेलदारी का काम छोड़कर एक हेलमेट फैक्टरी में काम करने लगी। एक दिन वह फैक्टरी जा रही थी, इस दौरान वह आया और और किशोरी को कुछ नशीला पदार्थ खिलाकर अपने साथ बिहार लेकर चला गया।
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एक महीने बाद पुलिस ने दर्ज किया था केस
किशोरी के लापता होने के एक महीने बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया था। रिपोर्ट दर्ज होने के चार महीने बाद बिहार से दोषी के घर से किशोरी को बरामद किया था। मुकदमे के विचारण के दौरान किशोरी के पिता की आठ जनवरी 2021 को मौत हो चुकी है। सुनवाई के दौरान आठ गवाह पेश किए गए थे।
धर्म परिर्वतन कर किया था निकाह
बिहार ले जाने के बाद किशोरी का धर्म परिवर्तन करने के साथ ही उसका नाम बदलकर राजमिस्त्री ने उसके साथ नेपाल में निकाह कर लिया था। निकाह के बाद 5051 रुपये की मेहर की थी। इसके बाद घर में दावत भी हुई थी। किशोरी ने बयान दर्ज कराया था कि पुलिस ने जिस समय पति के घर से उठाया था, वह चिल्ला रही थी और पुलिस द्वारा लाए जाने का विरोध किया था। अदालत में बयान दर्ज कराते हुए किशोरी अपने पूर्व बयान से पलट गई थी और निकाहनामे की बात को गलत बताया था।
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18 वर्ष से कम उम्र होने पर संरक्षक की सहमति जरूरी
जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश चंद्र शर्मा का कहना है कि 18 वर्ष से कम उम्र में निकाह या शादी होने पर संरक्षक की सहमति जरूरी है। इस मामले में किशोरी को बिना उसके माता-पिता की सहमति के बहला-फुसलाकर कर ले गया। ऐसी स्थिति में निकाह मान्य नहीं है। शासकीय अधिवक्ता का कहना है कि 18 वर्ष से उम्र कम होने पर किशोरी की सहमति मान्य नहीं है।
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