अफसरों तक पहुंची भूखंड घोटाले की आंच
गाजियाबाद। स्वर्ण जयंती पुरम भूखंड घोटाले में हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद जांच की आंच से तत्कालीन अफसरों की मुश्किल बढ़ना तय है। बीती सुनवाई में हाईकोर्ट ने अधूरे साक्ष्यों पर नाराजगी जताते हुए शासन से विस्तृत शपथ पत्र जमा करने के निर्देश दिए हैं। 16 साल पहले हुए चार करोड़ के भूखंड घोटाले की अब दो नवंबर को सुनवाई तय है। ऐसे में जांच अधिकारी मंडलायुक्त की ओर से जांच संबंधी दस्तावेजों की सिलसिलेवार पड़ताल कर रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी।
घोटाले के मुख्य जांचकर्ता और वरिष्ठ भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी ने बताया कि भूखंड घोटाले में शासन की ओर से प्रस्तुत शपथ-पत्र में तमाम साक्ष्यों का अभाव था। इस पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने कर्मचारियों के अलावा तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ जांच सहित रिपोर्ट सहित विस्तृत शपथ पत्र जमा करने के आदेश दिए हैं। मामले में पांच साल बीतने के बावजूद जांच प्रारंभिक स्तर पर चलने पर सवाल उठाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई में शासन को शपथ पत्र जमा करना होगा।
दूसरी ओर स्वर्णजयंती पुरम में आवंटित 123 भूखंडों की रजिस्ट्री निरस्त किए जाने का मामला सिविल कोर्ट में चल रहा है। मामले में सिविल कोर्ट का अगर कोई आदेश रजिस्ट्री निरस्त किए जाने संबंधी आता है तो योजना में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। लंबी खिंच रही जांच में आवंटन में गड़बड़ी का मामला साबित हो चुका है। ऐसे में रजिस्ट्री के निरस्त होने की संभावना जताई जा रही है।
अब तक किसी अधिकारी की नहीं हुई गिरफ्तारी:
भूखंड घोटाले के मामले में जीडीए के तत्कालीन अधिकारी डीपी सिंह, हीरालाल, आरपी पांडेय, आरसी मिश्रा सहित 36 कर्मचारी का नाम सामने आया था। घोटाले में हुई जांच में दोषी कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी हुई थी, लेकिन अब वह जमानत पर बाहर हैं। मामले में अब तक किसी अधिकारी की गिरफ्तारी नहीं होने से गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
नियमों को ताक पर रख कर किया भूखंड आवंटन:
जीडीए ने 1998 से 2003 के बीच स्वर्ण जयंती पुरम आवासीय योजना के तहत 1583 भूखंडों की 10 से ज्यादा योजनाओं को लांच किया था। आवंटन के बाद निर्धारित राशि जमा न करने या फिर भूखंड सरेंडर करने के कारण कई लोगों के आवंटन निरस्त कर दिए गए। निरस्त हुए 139 भूखंडों को नियमों को ताक पर रखकर फरवरी 2005 से फरवरी 2007 के बीच फिर से आवंटित कर दिया गया। भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी के मंडलायुक्त से शिकायत का कोई नतीजा नहीं निकलने पर उन्होंने 2011 में हाईकोर्ट में सरकार से मामले में हुए बड़े राजस्व के नुकसान की बात कहकर पीआईएल दायर की। पीआईएल पर जुलाई 2017 में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 137 भूखंडों के मामले में जीडीए के आरोपी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर और जांच के आदेश दिए।
सभी दोषियों से लिए जवाब, आरोप-पत्र की ड्राफ्ट रिपोर्ट भेजी:
मामले में शासन के आदेश पर शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों का लिखित पक्ष लिया गया। जीडीए ने 2019 में भूखंड आवंटन घोटाले में दोषियों के आरोप पत्रों की ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी थी। जीडीए ने आरोप पत्र तैयार करने से पहले सभी अधिकारियों व कर्मियों से उनका जवाब भी लिया था।