मुकदमे दर्ज हो चुके 14 पर एक भी आरोपी जेल में नहीं
गाजियाबाद। 22 करोड़ के मुआवजा घोटाले में पुलिस ने एक-एक करके केस तो 14 दर्ज कर लिए, लेकिन आरोपियों में से एक भी जेल में नहीं है। पहले दो केस में मास्टरमाइंड गोल्डी गुप्ता और उसके सहयोगी सुधाकर मिश्रा को गिरफ्तार जरूर किया गया था लेकिन पुलिस की ढिलाई से दोनों जमानत पर छूट गए। इसके बाद दोनों पर केस दर केस दर्ज होते गए लेकिन पुलिस उनका कोई सुराग नहीं लगा पाई। दोनों के खिलाफ चार केस में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। फिर भी वे खुले घूम रहे हैं।
एनसीआर के बड़े बिल्डर गोल्डी गुप्ता और एक प्रशासनिक अधिकारी के रिश्तेदार सुधाकर मिश्रा को पुलिस ने 21 मई को गिरफ्तार किया था। दोनों पर 12 केस दर्ज होने के बाद उनकी जमानत हुई तो पता चला कि पुलिस ने कोर्ट में सिर्फ दो की केस डायरी भेजी थी। इसलिए, 10 मामलों में उनके वारंट ही नहीं बने। उनके 29 जून को जेल से बाहर जाने के बाद पुलिस ने लुक आउट नोटिस जारी कराया ताकि दोनों विदेश न भाग सकें लेकिन यह पता नहीं चला कि वे कहां छिपे हैं। उनकी जमानत में पुलिस की ढिलाई सामने आने पर दरोगा को निलंबित कर दिया गया था।
ऐसे हुआ घोटाला
गोल्डी गुप्ता और उसके साथियों ने अधिकारियों और कर्मचारियों की सांठगांठ से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस में लिए अधिग्रहण में जमीन देकर मोटा मुआवजा लिया। जमीन अशोक सहकारी समिति के नाम से दी गई। समिति फर्जी थी। जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लग जाने के बाद भी बैनामे किए गए। इतना ही नहीं, ग्राम सभा की बंजर जमीन को अपनी बताकर मुआवजा ले लिया
ढिलाई : अफसरों के नाम खोले न कर्मचारियों के
घोटाले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया फिर भी जांच में बड़ी ढिलाई बरती गई। अब तक यही साफ नहीं हो पाया है कि गोल्डी और उसके साथियों ने किन अफसर और किन कर्मचारियों के साथ मिलकर यह घोटाला किया। एफआईआर में लिखा है कि तत्कालीन अफसर और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है लेकिन एसआईटी उनके नाम तक नहीं खोल पाई है।
बेबसी : गोल्डी की संपत्ति भी कुर्क नहीं कर पा रही पुलिस
गोल्डी गुप्ता के जेल से छूटकर फरार हो जाने के बाद पुलिस ने उसकी संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की लेकिन इसमें नाकामी हाथ लगी। उसके नाम गाजियाबाद में कोई संपत्ति नहीं मिली। उसका पता दिल्ली का है। वहां भी पुलिस गई तो पता चला कि उसके नाम से कोई संपत्ति नहीं है। ऐसे में पुलिस उसकी संपत्ति की कुर्की नहीं कर पा रही है। इतना संगीन मामला होने के बावजूद पुलिस की टीमें उसका कोई सुराग भी नहीं लगा पा रही है।
गिरफ्तारी के प्रयास जारी
एसपी सिटी निपुण अग्रवाल का कहना है कि गोल्डी गुप्ता और सुधाकर मिश्रा की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। गोल्डी के नाम से संपत्ति न मिल पाने के कारण कुर्की की कार्रवाई नहीं हो पाई है।