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विरोध ने दिखाया असर...एमएमएच कॉलेज में कम होगी बढ़ाई गई फीस

सार

एमएमएच डिग्री कॉलेज में फीस 98 फीसदी तक बढ़ा दिए जाने पर चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन का असर हुआ है। कॉलेज प्रबंधन बढ़ाई गई फीस को कम करने के लिए न केवल राजी हो गया है बल्कि इसके लिए कमेटी का गठन भी कर दिया गया है। इस मौके पर रोहित बसोया, विक्रांत त्यागी, शेखर कुमार, फैजाद सैफी, नमन, शिवानी, आयुषी, हिमांशु, दीपांशु, अंकित रावत मौजूद रहे।एमएमएच कॉलेज प्राचार्य डॉ. पीयूष चौहान का कहना है कि विश्वविद्यालय के नियमानुसार फीस बढ़ोतरी की गई थी।
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विस्तार
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विरोध ने दिखाया असर...एमएमएच कॉलेज में कम होगी बढ़ाई गई फीस
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गाजियाबाद। एमएमएच डिग्री कॉलेज में फीस 98 फीसदी तक बढ़ा दिए जाने पर चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन का असर हुआ है। कॉलेज प्रबंधन बढ़ाई गई फीस को कम करने के लिए न केवल राजी हो गया है बल्कि इसके लिए कमेटी का गठन भी कर दिया गया है। कमेटी सोमवार तक रिपोर्ट देगी। कॉलेज के छह हजार छात्रों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। कॉलेज प्रबंधन ने स्नातक और स्नातकोत्तर के पाठ्यक्रमों की फीस में 17 से 98 प्रतिशत तक की वृद्धि की थी। छात्र इसके विरोध में उतर आए थे। सबसे ज्यादा विरोध एलएलबी की फीस बढ़ाए जाने का था। यह 98 फीसदी बढ़ाई दी गई थी। विरोध को देखते हुए कॉलेज प्रबंधन ने फीस कम करने के लिए पिछले सप्ताह कमेटी गठित की थी। इससे अन्य पाठ्यक्त्रस्मों के छात्रों को भी उम्मीद दिखी। उन्होंने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिए। आखिर कॉलेज प्रबंधन को सभी पाठ्यक्रमों की बढ़ी हुई फीस को कम करने का निर्णय लेना पड़ा।
फीस वृद्धि वापस लेने की मांग
कॉलेज प्रशासन के निर्णय से पहले छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन बृहस्पतिवार को भी जारी रहा। उनकी मांग है कि फीस वृद्धि वापस ली जाए। भारतीय क्रांतिकारी समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय गांधी, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष भीष्म सिंह, किसान सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अवनीत पंवार, बार एसोसिएशन सचिव नितिन यादव सहित अन्य ने प्राचार्य को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन सौंपने के बाद फीस बढ़ाने के निर्णय को वापस लेने या फिर फीस को काफी कम करने की मांग की गई। । संजय गांधी ने कहा कि फीस वृद्धि कम होने के लिए कमेटी गठित होना सभी संगठनों और विद्यार्थियों की जीत है। इस मौके पर रोहित बसोया, विक्रांत त्यागी, शेखर कुमार, फैजाद सैफी, नमन, शिवानी, आयुषी, हिमांशु, दीपांशु, अंकित रावत मौजूद रहे।
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एमएमएच कॉलेज प्राचार्य डॉ. पीयूष चौहान का कहना है कि विश्वविद्यालय के नियमानुसार फीस बढ़ोतरी की गई थी। 20 साल बाद बढ़ी फीस एनसीआर के अधिकांश प्रमुख कॉलेजों से कम थी। कॉलेज में विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं बढ़ाने और विकास कार्य के तहत वृद्धि की गई थी। छात्र हित में स्नातक व परास्नातक पाठ्यक्रमों की फीस को कम करने का निर्णय लिया गया है। गठित की गई कमेटी जल्द अपना निर्णय सुनाएगी।
एलएलबी की सीट बढ़ाने के लिए करेंगे प्रयास
एमएमएच डिग्री कॉलेज में एलएलबी की मान्यता संबंधी विवाद तो वर्तमान सत्र में सुलझ गया है। लेकिन बार काउंसिल की ओर से वर्तमान में 120 सीटों का मान्यता प्रदान की गई है। ऐसे में छात्र संगठनों ने कॉलेज प्रशासन के साथ मिलकर एलएलबी में सीटों को कम से कम 300 कराने के संयुक्त प्रयास करने की बात कही है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि सीटें बढ़वाने के लिए लगातार बार काउंसिल के अधिकारियों के संपर्क में हैं।
धरना प्रदर्शन से लेकर मुख्यमंत्री तक शिकायत
एमएमएच कॉलेज में प्रथम वर्ष में बीए की फीस 72 फीसदी, बीकॉम की 80, एमकॉम की 27, एमए की 17 और एलएलबी की 98 फीसदी तक की वृद्धि की गई थी। इसके लिए सबसे पहले भारतीय क्रांतिकारी समिति की ओर से शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन शुरू किया गया। फिर फीस के खिलाफ आंदोलन से बार काउंसिल, किसान सेना, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अमन नागर, भीष्म सिंह के साथ एलएलबी के विद्यार्थी जुड़ते चले गए। कॉलेज में बीते एक सप्ताह से लगातार धरना प्रदर्शन जारी था। भारतीय क्रांतिकारी समिति की ओर से मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई शिकायत का कॉलेज प्रशासन को सीसीएसयू में जवाब देना पड़ा।
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फीस बढ़ाने पर उठे सवाल
जनपद में केवल एमएमएच डिग्री कॉलेज में वर्तमान सत्र में फीस बढ़ने पर कई सवाल उठे। छात्र संगठनों के साथ विद्यार्थियों ने कोरोना महामारी के बाद की गई बढ़ोतरी को छात्र विरोधी करार दिया। कॉलेज में बढ़ी संख्या में विद्यार्थी ग्रामीण क्षेत्रों और दूर-दराज से आते हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनके लिए बढ़ी फीस भरना कठिन था।
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