11 अगस्त को रेशम उर्फ ऋषि पाल दोपहर एक बजे महेश को पूछने घर पर आया था। उस समय महेश घर पर नहीं थे। रात 8:30 बजे रेशम दोबारा घर पर आया और यह कहकर महेश को साथ ले गया कि चल मेरे घर पर तेरा हिसाब कर देता हूं। उधार दी रकम वापस देने की बात कहकर वह महेश को बाइक पर बैठाकर साथ ले गए। पावी गांव के जंगल में ले जाकर ऋषिपाल व हरेंद्र सिंह ने पीट-पीटकर महेश की हत्या कर दी और शव गड्ढे में छिपा दिया था।
महेश रात को घर वापस नहीं आया। बिजेंद्र को यह बात 12 अगस्त को सुबह भतीजी ने बताई। वह सुबह गांव के ही महावीर रामधन और गजराज के साथ भाई को तलाश करता हुआ जा रहा था, पास के गांव के जंगल में ट्यूबवेल के पास खेत में भाई का शव पड़ा था। शरीर पर कई जगह चोट के निशान थे। बिजेंद्र ने आरोप लगाया था कि हत्या रेशम ने साजिश करके की है। अभियोजन पक्ष ने इस मामले में 10 गवाह अदालत में पेश किए। मंगलवार को दोषी करार देने के बाद ऋषिपाल और हरेंद्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।