कोरोना की दूसरी लहर में तमाम बच्चों ने अपनों को खो दिया। दूसरी ओर रोजगार चले जाने से तमाम अभिभावकों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। महामारी और मुश्किल दौर में महानगर के स्कूल बच्चों और अभिभावकों का सहारा बने। स्कूलों की पहल और आर्थिक मदद से माता-पिता को खोने वाले बच्चों के चेहरों पर फिर से मुस्कान लौट सकी। सामाजिक सौहार्द की मिसाल कायम करते हुए कई बड़े स्कूलों ने ऐसे बच्चों की 12वीं तक की पूरी फीस माफ करने का निर्णय लिया।
कई स्कूलों ने बीते सत्र की पूरी तो कई स्कूलों ने फीस में 20 से 50 फीसदी तक छूट प्रदान की। कठिन घड़ी में स्कूलों की पहल ने बच्चों के आंसुओं को खुशी में बदल दिया। कोरोना में नौकरी गंवाने वाले तमाम अभिभावकों को वार्षिक शुल्क के साथ फीस में भी छूट प्रदान की गई। शुरुआत में स्कूलों की ओर से बच्चों पर विशेष ध्यान देने के साथ टेस्ट से छूट, स्टडी मैटेरियल उपलब्ध कराने जैसी सहूलियतें प्रदान की गईं। उसी का असर है कि अब बच्चे कठिन दौर को पीछे छोड़कर उत्साह से अपना भविष्य संवारने में जुटे हुए हैं।
12वीं तक निशुल्क शिक्षा सहित इन स्कूलों ने दी राहत
कोरोना में कई बच्चों ने अपने पिता तो किसी ने मां को खो दिया। कठिन दौर में बच्चों के कंधों पर स्कूलों का हाथ रहा। इसी का परिणाम है कि निशुल्क शिक्षा की लौ जल लगातार जल रही है। नेहरू वर्ल्ड स्कूल में माता-पिता के खोने वाले 17 बच्चों की 12वीं तक की फीस माफ कर दी है। ठाकुरद्वारा बालिका विद्यालय ने 24 छात्राओं की 12वीं तक की निशुल्क शिक्षा का जिम्मा उठाया है।
केडीबी पब्लिक स्कूल में भी अपने माता-पिता को खो चुके नौ बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जा रही है। इसके अलावा गुरुकुल द स्कूल, डीपीएसजी, डीपीएस साहिबाबाद, डीडीपीएस, सिल्वर लाइन प्रैस्टीज स्कूल, डीपीएस एचआरआईटी, डीपीएस सिद्धार्थ विहार, डीपीएस राजनगर एक्सटेंशन, रायन इंटरनेशनल, इंग्राहम इंस्टीट्यूट सहित साहिबाबाद, मोदीनगर, मुरादनगर और लोनी के कई स्कूलों ने भी विद्यार्थियों की हर संभव मदद की।
फीस आधी करने के साथ हर संभव मदद
कोरोना में 30 बच्चों के माता-पिता की मृत्यु हुई। इनमें से अधिकांश की आधी फीस तो कुछ मामलों में पूरी फीस माफ की। बच्चों की काउंसिलिंग, निशुल्क पुस्तकें सहित अब भी हर संभव मदद की जा रही है।
अपर्णा रूथ, प्रिंसिपल, इंग्राहम अंग्रेजी स्कूल
मदद का सिलसिला है जारी
कोरोना में माता-पिता को खोने वाले बच्चों की स्कूल फीस माफ की गई। फिर बच्चे की आर्थिक स्थिति को देखते हुए फीस में छूट का निर्णय लिया गया। अगर कोई अभिभावक परेशानी लेकर आता है तो उसकी अब भी हर संभव मदद की जा रही है।
सुभाष जैन, चेयरमैन, सिल्वर लाइन प्रैस्टीज स्कूल