चमक-धमक से दूर रहे 5 विधायकों ने लगाई जीत की हैट्रिक, कई चूक गए
गाजियाबाद। विधायकों की शान-ओ-शौकत और चमक-धमक गाजियाबाद जिले के मतदाताओं को कम ही पसंद आई है। गाजियाबाद, मुरादनगर और मोदीनगर के मतदाताओं ने पांच साल जनता के बीच रहने वाले नेताओं को ज्यादा पसंद किया है। इसी का असर था कि जिले में अलग-अलग विधानसभा सीटों पर 5 ऐसे नेता रहे, जिन्होंने जीत की हैट्रिक लगाई। 90 के दशक के बाद राजनीति का मिजाज बदला तो मतदाताओं ने भी रुझान बदल लिया। वर्ष 2002 से अब तक कोई विधायक ऐसे नहीं रहे जिन्होंने जीत की हैट्रिक लगाकर पुराने नेताओं के रिकॉर्ड की बराबरी की हो।
आजादी के बाद 1951 में पहले विधानसभा चुनाव में गाजियाबाद नार्थ ईस्ट सीट से विधायक रहे विचित्र नारायण शर्मा और गाजियाबाद नार्थ वेस्ट सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने सरदार तेजा सिंह दोनों ने ही जीत की हैट्रिक लगाई। 1957 में नए परिसीमन पर हुए विधानसभा चुनाव में सरदार तेजा सिंह ने गाजियाबाद से दोबारा विजय हासिल की, वहीं विचित्र नारायण शर्मा ने मोदीनगर सीट से चुनाव लड़कर जीत का सिलसिला जारी रखा। इसके बाद 1962 के चुनाव में भी दोनों ने परिणाम दोहराए, लेकिन 1967 में हुए विधानसभा चुनाव में दोनों हार गए। इनके बाद विधानसभा की राजनीति में हैट्रिक लगाने वाले प्यारे लाल शर्मा, बालेश्वर त्यागी, राजपाल त्यागी और नरेंद्र सिंह सिसौदिया ऐसे नेता रहे हैं जिन्हें जनता ने बार-बार विधायक चुनकर विधानसभा में भेजा।
राजपाल त्यागी छह बार रहे विधायक
पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे राजपाल त्यागी ऐसे इकलौते विधायक रहे, जिन्होंने सबसे ज्यादा बार जीत हासिल की है। वह पांच बार आम विधानसभा चुनाव में और एक बार उपचुनाव में जीतकर विधानसभा में पहुंचे। उन्होंने हमेशा मुरादनगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा। वह कांग्रेस, सपा, बसपा के टिकट के साथ-साथ निर्दलीय चुनाव लड़कर भी जीत चुके हैं। इस विधानसभा क्षेत्र में उनका अलग प्यार और प्रभाव रहा है और जिसकी वजह से जनता ने उन्हें बार-बार जीत दिलाई।
3 बार विधायक रहे, नहीं बनी हैट्रिक
लगातार तीन बार विधायक रहे प्यारे लाल शर्मा के बेटे सुरेंद्र कुमार मुन्नी भी गाजियाबाद से तीन बार विधायक रहे, लेकिन हैट्रिक नहीं बना पाए। वह 1980 में पहली बार विधायक बने, लेकिन 1985 के चुनाव में पार्टी ने केके शर्मा को टिकट दिया। इसके बाद 1989 में उन्हें फिर टिकट मिला और जीते। 2004 में वह सुरेंद्र प्रकाश गोयल के सांसद बन जाने से खाली हुई गाजियाबाद विधानसभा सीट पर उपचुनाव लड़े। सपा की सरकार के कार्यकाल में हुए इस उपचुनाव में वह सत्तारूढ़ दल के प्रत्याशी थे और जीतकर तीसरी बार विधानसभा पहुंचे। हालांकि इसके बाद भी उन्हें टिकट मिला, लेकिन जीत का स्वाद न चख पाए। एक बार फिर वह रालोद के सिंबल पर मुरादनगर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में हैं। वहीं, मोदीनगर से सुखवीर सिंह गहलौत भी तीन बार विधायक रहे, लेकिन हैट्रिक नहीं लगी। वह 1980 में विधायक रहे, लेकिन 1985 में टिकट नहीं मिला। 1989 और फिर 1991 में दोनों बार चुनाव लड़े और जीत हासिल की।
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कब-कब जीते हैट्रिक बनाने वाले विधायक
नाम जीत के वर्ष
तेजा सिंह ---- 1951, 1957, 1962
विचित्र नारायण शर्मा ---- 1951, 1957, 1962
बालेश्वर त्यागी ---- 1991, 1993, 1996
राजपाल त्यागी ---- 1989, 1991, 1996, 2002, 2007
नरेंद्र सिंह सिसौदिया ---- 1993, 1996, 2002
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तीन बार विधायक रहे
सुखवीर सिंह गहलौत ---- 1980, 1989, 1991
सुरेंद्र कुमार मुन्नी ---- 1980, 1989, 2002