एक ही इंजन-चेसिस नंबर पर कई ट्रक चलाने वाला गैंग पकड़ा
गाजियाबाद। एक ही इंजन और चेसिस नंबर से कई ट्रक दौड़ाने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए भोजपुर पुलिस ने सरगना इंशाद निवासी जाफर कॉलोनी मसूरी समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। एसपी ग्रामीण डॉ. ईरज राजा ने बताया कि आरोपी नीलामी में खरीदे व फाइनेंस पर लिए ट्रकों के दस्तावेजों में हेराफेरी कर पुलिस व परिवहन विभाग की आंखों में धूल झोंकते थे। आरोपियों की निशानदेही पर 14 ट्रक, फर्जी दस्तावेज और ग्राइंडर बरामद किए हैं। गिरोह में कई अन्य लोग भी शामिल हैं, जिनकी धरपकड़ के लिए दबिश दी जा रही है।
एसपी ग्रामीण ने बताया कि मसूरी निवासी वहाब रियाज और सलीम अली का ट्रक चोरी हो गया था। उन्होंने मसूरी निवासी इंशाद को नामजद करते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। पीड़ितों का आरोप था कि किराए पर ट्रक लेकर इंशाद ने कुछ दिन चलाया और फिर उसे गायब कर दिया। एसपी ग्रामीण का कहना है कि इंशाद की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उन्होंने एसओजी टीम लगाई थी। पता चला कि इंशाद उस गैंग का सरगना है, जो कई आरसी पर कई ट्रकों को देश के कोने-कोने में चलाता है। इसके बाद टीम ने शनिवार देर रात तक इंशाद समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की पहचान जीशान निवासी मोहल्ला उपाध्यान थाना किठौर मेरठ, फरियाद निवासी ग्राम देहरा थाना धौलाना हापुड़, संजय सोनी निवासी ग्राम कलौंदा गौतमबुद्धनगर व राहुल निवासी ग्राम रनौली गौतमबुद्धनगर के रूप में हुई है।
फाइनेंस के वाहनों पर डाल देते थे नीलामी में खरीदे ट्रकों के नंबर
एसपी ग्रामीण का कहना है कि सभी आरोपी ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद वह जालसाजी करने में अव्वल हैं। आरोपी सरकारी विभाग की नीलामी में वाहन सस्ते दामों में खरीद लेते थे। अधिकतर इन वाहनों को कटवा देते थे, लेकिन उनके दस्तावेजों पर दर्ज इंजन व चेसिस नंबर अन्य ट्रकों पर डलवाकर उन्हें चलवाते थे। दूरदराज इलाके में ट्रासंपोर्ट कार्य के चलते एक ही इंजन व चेसिस नंबर पर कई ट्रक चलाते थे।
प्रदेशभर में फैला है गिरोह का नेटवर्क
पुलिस का कहना है कि गिरोह का जाल पूरे प्रदेश में फैला है। इसमें कई अन्य आरोपी भी शामिल हैं, जिनमें से कुछ ट्रेस भी हो चुके हैं। गिरोह के सदस्य लोन पर लिए ट्रकों की चोरी में एफआईआर दर्ज कराकर उन्हें फर्जी कागजातों और नंबरों के आधार पर चलाते थे। जिसके चलते फाइनेंस कंपनियां भी उन्हें पकड़ने में नाकाम रहती थी। एसपी ग्रामीण के मुताबिक, जीशान के ससुर ने लोन पर ट्रक खरीदा था। जिसे गायब दिखाकर उन्होंने एफआईआर दर्ज करा दी और फिर दामाद व ससुर एक ही नंबर पर अलग-अलग रूट पर अपने-अपने ट्रक चला रहे थे।
हर सदस्य का था अलग-अलग काम
गिरोह में शामिल हर सदस्य पर अलग-अलग जिम्मेदारी थी। इंशाद किराए पर ट्रक चलवाने वाले लोगों को तलाशता था तो फरियाद फर्जी आरसी बनवाने का काम करता था। इसके अलावा अन्य सदस्य ट्रकों के चेसिस व इंजन नंबर बदलने की जिम्मेदारी निभाते थे। एसपी ग्रामीण ने बताया कि गिरोह की चेन काफी लंबी है। प्रदेशभर में कई लोग गिरोह से जुड़े हैं। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 50 से भी अधिक ट्रक सड़कों पर दौड़ाए जा रहे हैं। जल्द ही उन्हें ट्रेस कर अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जाएगा।