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सामान्य मरीजों के लिए अस्पताल तैयार, डॉक्टरों की दरकार

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कोरोना संक्रमण के मामले कम होने के बाद एक बार फिर संयुक्त अस्पताल सामान्य मरीजों के इलाज के लिए तैयार हो गया है। साफ-सफाई के साथ ही रंगरोगन भी करा दिया गया है। सबसे बड़ी समस्या आ रही है कि अस्पताल में मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर ही नहीं रह गए हैं। 36 डॉक्टरों के बजाए सिर्फ दस डॉक्टर अस्पताल में बचे हैं। कोरोना संक्रमण काल के दौरान अस्पताल से दस डॉक्टर पदोन्नति एवं तबादला होने के बाद कम हो गए हैं। ऐसे में अगर अस्पताल खुल भी जाता है तो इलाज करने वाले नहीं हैं।
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मार्च में कोरोना संक्रमण शुरू होने पर गंभीर मरीजों के इलाज के लिए संयुक्त अस्पताल को अप्रैल महीने में कोविड लेवल-2 बना दिया गया था। यहां पर 17 मई से गंभीर मरीजों का इलाज शुरू हुआ और अब तब 1967 मरीजों का इलाज किया गया। वर्तमान में अस्पताल में सिर्फ एक मरीज भर्ती है। वह भी जल्द ही डिस्चार्ज हो जाएगा। इससे एक बार फिर से अस्पताल खाली हो गया है। अब डॉक्टर सहित सैकड़ों पैरामेडिकल स्टाफ को घर बैठे तनख्वाह मिल रही है।

मरीज नहीं तो अस्पताल के पार्क में बिताते हैं समय
अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि हम तो इलाज करने के लिए तैयार हैं लेकिन विभाग ही काम नहीं लेना चाह रहा है। आठ बजे अस्पताल में आ जाते हैं और दो बजे के बाद फिर घर चले जाते हैं। उन्होंने बताया कि ओपीडी की दो बार साफ-सफाई करा चुका हूं लेकिन मरीज नहीं है तो कहीं चाय की दुकान पर या अस्पताल के पार्क में समय बिताते हैं। अगर सामान्य ओपीडी शुरू हो जाए तो एमएमजी अस्पताल का भी दबाव कम हो जाए और मुरादनगर, संजयनगर, राजनगर, गोविंदपुरम, डासना, मसूरी सहित आसपास के मरीजों को इलाज में सहूलियत मिलने लगे।
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अस्पताल के डॉक्टर सीएमओ, सीएमएस और जेल में मिली तैनाती
कोरोना संक्रमण काल के समय ही एक मरीज को भर्ती करने में लापरवाही करने पर मामला शासन स्तर तक गूंजा तो तत्कालीन सीएमएस डॉ. नरेश विज का प्रशिक्षण केंद्र आगरा तबादला कर दिया गया। इसके बाद अस्पताल के ही वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. संजय तेवतिया को मुख्य चिकित्सा अधीक्षक बना दिया गया। नवंबर महीने में अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन डॉ. अखिलेश मोहन मेरठ के मुख्य चिकित्साधिकारी बन गए। उनकी जगह आज भी सर्जन के पद खाली हैं। सीनियर पैथॉलाजिस्ट डॉ. एमके तोमर एक सप्ताह पहले जेल में सीनियर परामर्शदाता बन गए। उनकी जगह भी रिक्त हो गई। इनके अलावा कोरोना संक्रमणकाल में संक्रमित मरीजों का इलाज न करने पर चार महिला रोग विशेषज्ञों का तबादला एमएमजी एवं महिला अस्पताल में हो गया था। एक महिला चिकित्सा अपर निदेशक स्वास्थ्य बनने के बाद चली गई थीं।

कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए आए डॉक्टर जा चुके हैं तैनाती वाले जिले में
कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने पर शासन ने बागपत, हापुड़, बुलंदशहर एवं वाराणसी से डॉक्टरों को इलाज संयुक्त अस्पताल में भेजा था। संक्रमण कम होने के बाद मरीजों की संख्या कम होते ही इलाज के लिए गैर जनपद से आए डॉक्टर तैनाती वाले मूल जनपद में जा चुके हैं। ऐसे में अगर अस्पताल में सामान्य मरीजों के इलाज के लिए शुरू कर दिया जाएगा तो डॉक्टर ही नहीं बचे हैं।

इन डाक्टरों की है जरूरत
अस्पताल में 36 डॉक्टरों के बाद स्वीकृत हैं। इनमें से सिर्फ दस डॉक्टर बचे हैं यानि की पद के सापेक्ष 26 डॉक्टरों के पद रिक्त हैं। इनमें एक फिजीशियन, हृदय रोग विशेषज्ञ, त्वचा रोग विशेषज्ञ, एक सर्जन, चार महिला रोग विशेषज्ञ, चार ईएमओ एवं एक पैथॉलोजिस्ट के बिना सामान्य मरीजों के इलाज में परेशानी आनी तय है। इसके चलते अस्पताल प्रबंधन सामान्य मरीजों का इलाज शुरू होने से पहले डॉक्टरों की नियुक्ति के प्रयास में है।

अब संक्रमण कम हो गया है। सामान्य मरीजों के इलाज के लिए अस्पताल में साफ-सफाई कराने के साथ ही नए सिरे से अपडेट कर दिया गया है। मरीजों का इलाज शुरू होने से पहले अस्पताल में डॉक्टरों की नियुक्ति करने के लिए शासन को पत्र लिखकर मांग की गई है। शासन स्तर से निर्णय होगा कि सामान्य मरीजों के लिए कब अस्पताल शुरू होगा। - डॉ. संजय तेवतिया, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक संयुक्त अस्पताल

संयुक्त अस्पताल को शासन स्तर से कोविड लेवल-2 बनाया गया था। वर्तमान में जिले में कोरोना संक्रमण बहुत कम हो गया है। शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है। शासन स्तर से ही निर्णय लिया जाएगा कि अस्पताल को कब सामान्य मरीजों के लिए शुरू किया जाएगा। - डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ
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