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ग्राम पंचायत में एक ही काम को करा दिया दो बार

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ग्रामीण विकास के लिए दिया गया बड़ा बजट जमीन में दबता चला गया लेकिन किसी अधिकारी ने उस पर आपत्ति उठाने की जहमत नहीं की। स्थानीय लोगों ने कुछ मामलों को लेकर शिकायतें भी कीं लेकिन अभी तक की जांच का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। पंचायत स्तर से प्रस्ताव बनते रहे और जिला स्तर पर बैठे अधिकारी उन्हें पास करते रहे। किसी न यह जानने की कोशिश नहीं की कि जिस काम का एस्टिमेट तैयार किया गया है वो पहले भी कराया जा चुका है। मुरादनगर के जलालपुर रघुनाथपुर गांव में विकास पर हुए खर्च की कहानी कुछ यही बया कर रही है। जहां बरात घर में मिट्टी का भराव करने के नाम पर दो बार धनराशि खर्च की गई।

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वित्तीय वर्ष 2019-20 में ग्राम पंचायत को एक करोड़ पांच लाख 39 हजार रुपये का बजट खर्च करने लिए आवंटित किया गया। बरात घर को बेहतर बनाने पर तीन मदों में पैसा खर्च दिखाया गया। पहले क्रमांक संख्या 57 में बरात घर के प्रांगण में मिट्टी का भराव और फिर क्रमांक संख्या 74 पर बरात घर की दीवार और मिट्टी का भराव दिखाकर दो-दो लाख रुपया खर्च करने का प्रस्ताव दिया गया। जबकि इससे पहले बरात घर में इंटरलॉकिंग पर पांच लाख रुपये खर्च करने का प्रस्ताव दिया जा चुका था। मामला यहीं पर नहीं थमा। वित्तीय वर्ष 2020-21 में भी बरात घर में विभिन्न कार्य दिखाकर 3.20 लाख रुपये खर्च करने का प्रस्ताव रखकर मोटी रकम खर्च दिखाई गई।

इस वित्तीय वर्ष में विभिन्न कार्यक्रमों से जुड़ी पेंटिंग कराने पर भी मोटी धनराशि खर्च की गई। एक मद से गांव में पेंटिंग कार्य दिखाकर डेढ़ लाख रुपया खर्च किया गया। उसके बाद फिर से पेंटिंग कार्य दिखाकर 1.70 लाख रुपया सरकारी खजाने से निकाला गया। जबकि गांव में हुए बड़े कार्यों में पेंटिंग व सुंदरीकरण के कार्य पर अलग से धनराशि खर्च की गई। जैसे खेल मैदान पर एक लाख श्मशान घाट में पेंटिंग पर डेढ़ लाख और गांव में विभिन्न स्थानों पर स्लोगन लेखन में 50 हजार रुपया खर्च कर दिया गया लेकिन किसी अधिकारी ने खर्च से जुड़ी इस व्यवस्था पर आपत्ति दर्ज नहीं कराई। वित्तीय वर्ष 2020-21 में भी एक करोड़ चार लाख 99 हजार रुपये से अधिक की धनराशि आवंटित की गई है। इसमें से भी बड़ी रकम सुंदरीकरण, पेंटिंग और मरम्मत कार्यों में खर्च की गई, जिसे लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि कई ऐसे मदों पर खर्च दिखाया गया था जो कार्य बीते वित्तीय वर्ष में हो चुके थे।
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ई-रिक्शा की कीमत से अधिक खर्च कर दिया किराए पर
पंचायत में सरकारी धन खर्च करने के लिए कोई ठोस योजना नहीं थी। ग्राम सचिव और प्रधान जिस रास्ते से प्रस्ताव रखते रहे, उसी से धन खर्च होता रहा। खर्च से जुड़ी कई व्यवस्थाओं को देखकर इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में 90 हजार रुपये ई-रिक्शा के किराए पर खर्च करने के बाद वित्तीय वर्ष 2020-21 में 80 हजार में रिक्शा की खरीद और रखरखाव का प्रस्ताव रख दिया। अब 80 हजार रुपये में नया रिक्शा खरीदा जा सकता था तो फिर 90 हजार किराए पर क्यों खर्च कर दिए गए।

2018 से शिकायतों के बाद चल रही जांच
गांव में निर्माण कार्य में गड़बड़ी को लेकर 13 दिसंबर 2018 को पहली बार जनपद स्तर पर शिकायत की गई। इसके बाद तमाम स्तर पर शिकायतें की गई। उसके बाद तीन बार अलग-अलग स्तर से व्यापक जांच के आए हुए हैं लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अंतिम जांच जिला समाज कल्याण अधिकारी को सौंपी गई, जिनकी तरफ से रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई का इंतजार है।

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