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ग्राम पंचायतों में बेलगाम खर्च, कहीं नहीं लगी आपत्ति

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बीते पांच वर्षों में विकास के नाम पर ग्राम पंचायतों में बेलगाम खर्च किया गया। बड़ी धनराशि हैंडपंप रिबोर और उनकी मरम्मत से लेकर भराव (मिट्टी डालने) जैसे कार्यों पर खर्च की गई। तमाम मदों पर हुए खर्च सवालों के घेरे में हैं। ग्राम पंचायतों में मदवार खर्च का अलग-अलग फार्मूला अपनाया गया जो पंचायतीराज विभाग के सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।
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कहीं पर हैंडपंप की मरम्मत 20 हजार रुपये में हुई तो कहीं पर 50 हजार रुपया खर्च कर दिया। मामला यहीं तक नहीं है, विभिन्न योजनाओं के तहत हुए अन्य निर्माण कार्यों के खर्च में भी भारी अंतर पाया गया। कुछ ग्राम पंचायतों में इमरजेंसी मद बनाकर मोटी धनराशि खर्च दिखाई गई। भोजपुर ब्लॉक के नहाली गांव में वित्तीय वर्ष 2020-21 में करीब 58 लाख रुपया हैंडपंपों के रिबोर पर खर्च कर दिया गया।

इस वित्तीय वर्ष में पहले से तैयार नाहली के आंगनबाड़ी केंद्र पर पांच लाख 90 हजार रुपया चार मदों में खर्च कर दिया गया। टाइल्स लगाने पर 1.22 , बिजली फिटिंग पर 1.37, रंगाई-पुताई पर 1.65 और मरम्मत पर 1.66 लाख रुपया का एस्टिमेट बना। अब इसी वर्ष मुरादनगर क्षेत्र के फिरोजपुर गांव में 1.80 लाख की लागत से आंगनबाड़ी केंद्र बना। अब दोनों मामलों को देखकर सवाल उठता है कि अगर नए आंगनबाड़ी केंद्र की बिल्डिंग 1.80 लाख रुपये में तैयार हो गई तो फिर नहाली में 1.66 लाख रुपया सिर्फ मरम्मत पर खर्च करने की क्या आवश्यकता थी। यही अंतर आपको हैंडपंपों की मरम्मत से जुड़े कार्यों में भी ग्राम पंचायतवार दिखाई देगा। वर्ष 2019-20 में फिरोजपुर गांव में हैंडपंपों की मरम्मत पर 20-20 हजार रुपया खर्च दिखाया गया।
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जबकि नहाली में 50-50 हजार रुपया हैंडपंपों की मरम्मत पर खर्च किया गया। इतना ही नहीं कुछ मदों पर एक ही वर्ष में दो बार एस्टिमेट तैयार किया गया। मुरादनगर क्षेत्र के ही रेवड़ा-रेवड़ी गांव में क्रमांक संख्या 27 से प्राइमरी स्कूल में डिजिटल पेंटिंग कार्य हेतु 2.20 लाख रुपये का एस्टिमेट तैयार किया गया। फिर वर्ष में क्रमांक संख्या 73 से 2.20 लाख रुपया का एस्टिमेट तैयार हुआ। अब सवाल सिस्टम पर उठना लाजमी है। एक ही काम के लिए दो-दो बार एस्टिमेट कैसे तैयार कर लिया गया। अगर कोई काम एक ग्राम पंचायत में 20 हजार में हो रहा था तो वही काम दूसरी पंचायत में 50 हजार रुपये में कैसे स्वीकृति किया गया। किसी ने इस पर आपत्ति उठाने तक की जहमत नहीं उठाई।
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कई मद अपने स्तर पर हुई तैयार
कुछ ग्राम पंचायतों में कई मदों को अपने स्तर पर तैयार किया गया। जैसे इमरजेंसी कार्य दिखाकर मोटी रकम खर्च की गई। डासना देहात क्षेत्र इसका उदाहरण है। इसी ग्राम पंचायत में आईजीआरएस की शिकायत का निस्तारण करने पर वर्ष 2019-20 में पांच-पांच लाख रुपया खर्च दिखाया गया। जबकि वित्तीय वर्ष 2020-21 में आईजीआरएस यानी जनसुनवाई पोर्टल पर जन समस्या को लेकर लोगों की तरफ से की गई शिकायत के निस्तारण पर 40-40 हजार रुपया खर्च किया गया। एस्टिमेट को देख कर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि हर बार शिकायत के निस्तारण करने में एक समान राशि खर्च की गई। विभाग के सामने सब कुछ पोर्टल पर था लेकिन किसी ने ग्राम सचिव से जवाब-तलब करने की जहमत तक की नहीं उठाई।
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वर्जन
हम ऐसे सभी मामलों की जांच करा रहे हैं। ग्राम सचिव से भी पूछा जा रहा है लेकिन कुछ कार्यों में एस्टिमेट से कम भी खर्च होता है। बाकी अगर कहीं पर गड़बड़ी है तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी। - अनिल त्रिपाठी, पंचायतीराज अधिकारी
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