वर्षा जल संचयन की नहीं की व्यवस्था तो नक्शा होगा निरस्त
गाजियाबाद। वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) की व्यवस्था नहीं करने वाले सोसाइटी व भू-स्वामियों के नक्शे के कैंसिल होने की तलवार लटकी हुई है। जल शक्ति अभियान के तहत जीडीए ने सभी आठ जोन में सर्वे कर 236 ऐसी बिल्डिंग चिह्नित की हैं, जहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में इन भवनों के स्वामियों को नोटिस जारी कर 10 दिनों के अंदर वर्षा जल संचयन की व्यवस्था करने के आदेश दिए हैं। इसके बावजूद अगर कोई भवन स्वामी आदेशों की अनदेखी करता है तो तत्काल प्रभाव से उसका नक्शा निरस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
पानी की गहराती समस्या और एनसीआर में गिरते भू-जल स्तर ने खतरे की घंटी बजा दी है। पानी की समस्या को लेकर महानगर की कई कॉलोनियों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में वर्षा जल के समुचित तरीके से संचयन के लिए प्रदेश स्तर से ही कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। जीडीए के बिल्डिंग बायलॉज के अनुसार 300 वर्ग मीटर से बड़े भूखंड में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की व्यवस्था होनी जरूरी है। ऐसे में जीडीए के चलाए गए सर्वे अभियान में गहनता से भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निरीक्षण किया गया।
जोन-6 निशाने पर, 138 भवनों में नहीं रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
जीडीए के चलाए गए सर्वे अभियान में सबसे अधिक जोन-छह में इंदिरापुरम और उससे सटे एरिया में सर्वाधिक 138 सोसाइटियों और 300 वर्ग मीटर एरिया से बड़े भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था नहीं है। जोन-6 के बाद जोन-तीन में 44, जोन-आठ में 27, जोन-चार में 17, जोन-सात में सात और जोन-पांच में तीन भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगा है। वहीं सभी आठ जोन में 51 भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के तो बंदोबस्त थे, लेकिन सिस्टम चालू नहीं था। सर्वे में 253 भवनों में सिस्टम संचालित पाए गए, जबकि 130 बिल्डिंगों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का काम जारी मिला। तीन भवनों के केवल नए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं।
कोट...
सभी आठ जोन में 236 ऐसे भवनों को चिह्नित किया गया है, जहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगा है। ऐसे में ऐसे भवन स्वामियों को नोटिस देकर 10 दिन में सिस्टम लगाने का समय दिया गया है। इसके बावजूद आदेशों की अनदेखी करने पर नक्शा निरस्त करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। - कंचन वर्मा, उपाध्यक्ष, जीडीए