निजी अस्पतालों की 60 फीसदी एंबुलेंस अनफिट
गाजियाबाद। स्कूल संचालकों की लापरवाही के चलते जहां 297 स्कूली बसें अनफिट बच्चों की आवाजाही कर रही हैं, वहीं लापरवाही बरतने में एंबुलेंस के चालक भी पीछे नहीं हैं। परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक निजी अस्पतालों की 60 फीसदी एंबुलेंस अनफिट हैं। अस्पतालों की 997 एंबुलेंस परिवहन कार्यालय में पंजीकृत हैं, जिनमें से 399 के पास ही फिटनेस प्रमाण पत्र हैं। 598 एंबुलेंस अनफिट होने के बावजूद जिंदगी और मौत से जूझ रहे मरीजों को लाने-छोड़ने का काम कर रही हैं।
एआरटीओ राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि हाल ही में जिलाधिकारी के साथ बैठक के बाद अनफिट एंबुलेंस रखने वाले अस्पतालों को नोटिस भेजा गया है। अगर एंबुलेंस बिना फिटनेस प्रमाण पत्र के सड़क पर मिलती है, तो उसे जब्त कर लिया जाएगा। एंबुलेंस की फिटनेस के लिए भी सामान्य बसों की तरह प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। डासना स्थित फिटनेस सेंटर पर एंबुलेंस की फिटनेस कराई जाती है। इसके लिए 700 रुपये की फीस के साथ जरूरी दस्तावेजों को पूरा कराना होता है। फिटनेस सेंटर के तकनीकी अधिकारी शेर सिंह ने बताया कि एंबुलेंस की फिटनेस से पहले साइड मिरर, रेडियम मिरर, सामने अंग्रेजी के उल्टे अक्षरों व सीधे अक्षरों में एंबुलेंस लिखा होना, टायर, शूकर, गियर और शीशों को चेक किया जाता है। इसके बाद एंबुलेंस को ऑनलाइन माध्यम से निरीक्षण करने वाली कंप्यूटराइज्ड मशीनों के टेस्ट में पास होना पड़ता है।
लखनऊ से होती है फिटेनस
एमएमजी अस्पताल के पास 32 एंबुलेंस हैं, जिनमें से 16 एंबुलेंस 108 हेल्पलाइन नंबर से जुड़ीं हैं और 17 एंबुलेंस 102 हेल्पलाइन नंबर से जुड़ी हैं। नोडल अधिकारी जयवेंद्र सिंह का कहना है कि एक साल की अवधि होने पर एंबुलेंस लखनऊ भेजकर फिटनेस करा ली जाती है। वर्तमान में सभी एंबुलेंस पूरी तरह फिट हैं।