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फर्जी दस्तावेजों से बेच दी एनआरआई की एक करोड़ की संपत्ति

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फर्जी दस्तावेजों से बेच दी एनआरआई की एक करोड़ की संपत्ति
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गाजियाबाद। राजनगर आरडीसी निवासी एनआरआई डा. सुरेंद्र डेविड साइमन की आरडीसी स्थित एक करोड़ की कीमत का मकान रिश्तेदार ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर बेच दिया। आरोपी रिश्तेदार ने सब रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्ट्री के समय डॉ. सुरेंद्र की जगह अन्य किसी व्यक्ति को दिखाकर फर्जीवाड़ा किया। आरोप है कि बैंक से साठगांठ कर 50 लाख का लोन भी करा दिया। डॉ. सुरेंद्र का कहना है कि वह अमेरिका में रहते हैं। सभी काम उनकी गैर मौजूदगी में हुए हैं। इसकी जानकारी उन्हें तब हुई जब उन्होंने यह मकान किसी और को बेचा। मामले में डॉ. सुरेंद्र ने अपने रिश्तेदार अमित समेत 11 लोगों के खिलाफ कविनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
डॉ. सुरेंद्र डेविड साइमन का कहना है कि उनका आरडीसी में दो मंजिल का मकान है। इसकी देखरेख उनकी पत्नी का भतीजा अमित करता है। मकान उनकी पत्नी के नाम था। उनकी पत्नी की मई 2015 में मौत हो गई थी। इसी कारण उन्होंने अमित से जीडीए में नाम बदलने की प्रक्रिया कराई। इसके लिए उन्होंने अमित को दस्तावेजों की कॉपी भेजी। आरोप है कि अमित ने उन दस्तावेजों का इस्तेमाल करके उनके जाली हस्ताक्षर और झूठा प्राधिकार पत्र तैयार कर लिया और दिल्ली निवासी दीपक चौधरी नाम के व्यक्ति को बेच दिया। आरोप है कि अमित ने साठगांठ करके अगस्त 2019 में सब रजिस्ट्रार द्वितीय के यहां मेरठ निवासी एक व्यक्ति को सुरेंद्र डेविड साइमन बनाकर पेश किया और मकान की रजिस्ट्री करा दी। इस मामले में अमित के साथ हरपाल, विजय, राजेंद्र कुमार अधिवक्ता, राजेंद्र सिंह, चंद्रपाल, उपनिबंधक सदर द्वितीय के कर्मचारी, उपनिबंधक सदर चतुर्थ के कर्मचारी, बैंक ऑफ इंडिया कौशांबी के अधिकारी व कर्मचारी व अधिवक्ता विद्या बिष्ठ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। कविनगर थाना प्रभारी आनंद प्रकाश मिश्रा का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। दस्तावेज मांगे गए हैं। जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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बैंक से नोटिस आने पर हुई जानकारी
डॉ. सुरेंद्र के अधिवक्ता अरविंद शिशौदिया ने बताया कि यह मकान उन्होंने फरवरी 2022 में डॉ. सुरेंद्र से खरीदा था। मकान पर कब्जा लेने के कुछ दिन बाद उनके पास बैंक ऑफ इंडिया से नोटिस आया कि इस पर 50 लाख रुपये का लोन है। इस मामले में जानकारी करने पर पता चला कि यह मकान किसी दीपक चौधरी नाम के व्यक्ति को बेचा गया है। कागज निकलवाने पर पता चला कि बैंक में बिना मूल दस्तावेजों के आधार पर फर्जीवाड़ा हुआ है। उनके पास मूल दस्तावेज हैं।
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