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पीपीई किट पहनने पर पसीने से हो जाते थे तर-बतर, इलाज व सर्विलांस से कोरोना हराया

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पीपीई किट पहनने पर पसीने से हो जाते थे तर-बतर
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गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण फैलने के बाद मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना उनका इलाज करना और मरीजों के संपर्क में आने वालों को खोजना बड़ी चुनौती थी। फिर भी स्टाफ ने यह काम अच्छे से किया। डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ के बुलंद हौसलों की वजह से कोरोना को नियंत्रित करने में कामयाबी मिली। हालांकि जंग अभी जारी है। 24 मार्च को देश में लॉकडाउन हुआ तो जिले में सन्नाटा छा गया था।
पीपीई किट की परेशानी दिखती थी छोटी
मेरी ड्यूटी कोविड लेवल-2 संजय नगर में लगी थी। 15 अप्रैल से अस्पताल शुरू हुआ था, उस समय स्टाफ भी संक्रमण के भय से दहशत में रहता था। अप्रैल में गर्मी भी बढ़ गई थी। उस समय पीपीई किट पहनने के बाद पसीने से पूरा शरीर भीग जाता था। इससे भी अधिक परेशानी होती थी कि संक्रमण से बचने के लिए चेहरे से पसीना तक नहीं पोंछ पाते थे। इलाज के बाद जब मरीज स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज होते थे, उनके चेहरे की खुशी देखकर अपनी परेशानी भूल जाते थे।
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डॉ. राजेश कुमार, डेंटल सर्जन संयुक्त अस्पताल
शाम को मरीज डिस्चार्ज होने पर उतर जाती थी थकान
कोविड लेवल-2 बनने से पहले लेवल-1 के भी कोरोना मरीज भर्ती होते थे। संक्रमण की शुरुआत थी तो हर कोई डरता था। शासन ने कोविड लेवल-2 बना दिया तो उसी के अनुसार व्यवस्था भी बदलना शुरू हुआ था। नई सुविधा के अनुसार अस्पताल में सामान, दवाई, पीपीई किट और सैनिटाइजर उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती का काम हो गया था। हर कोई अस्पताल भवन से दूरी बनाए रखता था। सिर्फ वार्ड में स्टाफ पीपीई किट पहनता था, लेकिन जब शाम को मरीजों के स्वस्थ होने का आंकड़ा अपडेट होता था तो पूरे दिन की थकान उतर जाती थी।
आरडी यादव, चीफ फार्मासिस्ट
जांच पर काउंसलिंग के बाद भर्ती होने पर मिलता था सुकून
संक्रमण बढ़ने पर गर्भवती महिलाओं की प्रसव से पहले कोरोना जांच अनिवार्य कर दी गई थी। जो महिलाएं जांच कराने के लिए आती थीं और उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आती तो वह चुपके से चलीं जाती थीं। इससे घर के अन्य सदस्यों और पड़ोसियों में संक्रमण फैलने का भय रहता था। इसलिए जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आती थी, उनकी काउंसिंलिंग करना और अस्पताल में भर्ती कराना बड़ी चुनौती बन गई थी। अस्पताल में भर्ती होने के बाद जब उनकी रिपोर्ट निगेटिव आती तो लगता मेहनत सफल हो गई।
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डॉ. शेफाली, पैथोलाजिस्ट महिला अस्पताल
पहले किया सर्वे अब टीकाकरण
संक्रमण बढ़ने पर सर्वे अभियान शुरू किया गया था। उस दौरान संक्रमित के संपर्क में आने वालों की पड़ताल कर उनकी काउंसलिंग करने में इसलिए परेशानी आती थी कि संपर्क वाले से बात करने पर वह ऐसे व्यवहार करते थे कि जैसे मरीज के संक्रमण की चपेट में आने के हम लोग ही जिम्मेदार हों। इसके बावजूद उन्हें समझाया जाता था। उस समय बहुत संतुष्टि मिलती थी कि जब हम लोगों के कहने पर वह जांच कराते थे। उस समय किराए पर कमरे भी नहीं मिल रहे थे, इसलिए प्रतिदिन घर दनकौर से आना पड़ता था। अब साहिबाबाद के नगरीय स्वास्थ्य केंद्र पर लोगों का टीकाकरण कर रहा हूं।
रविंद्र कुमार, फार्मासिस्ट
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