गौरैया बचाने को घर-घर पहुंचा रहे कृत्रिम घोंसले
गाजियाबाद। विज्ञान और विकास के बढ़ते कदम ने हमारे सामने कई चुनौतियां भी खड़ी की हैं,
जिससे निपटना हमारे लिए आसान नहीं है। विकास की महत्वाकांक्षी इच्छाओं ने हमारे सामने
पर्यावरण की विषम स्थिति पैदा की है। इसका असर इंसान पर ही नहीं बल्कि पशु-पक्षियों
पर भी दिखने लगा है। इंसान के बेहद करीब रहने वाली नन्हीं सी चिड़िया गौरैया विलुप्त
हो गई है।
घर की दीवारों और पेड़ों पर फुदकती गौरैया अब दिखाई नहीं देती है। गौरैया को बचाने के लिए पर्यावरण एवं पशु पक्षियों के संरक्षण के लिए काम कर रहे विजयपाल बघेल और रामवीर सिंह ने इसको जीवन का हिस्सा बना लिया है। इसके लिए वह घर-घर जाकर कृत्रिम घोंसले वितरित कर रहे हैं। वह लोगों को जागरूक कर रहे हैं कि घर में थोड़ा सा हिस्सा गौरैया के लिए जरूर छोड़ें। जहां गौरैया रहती है, वहां सुख और शांति होती है और बरकत होती है।
15 वर्ष से गौरैया बचाने को कर रहे पहल
पर्यावरण पर काम कर रहे विजयपाल बघेल ने बताया कि वह 2007 से लगातार गौरैया संरक्षण
अभियान चला रहे हैं। उन्होंने पिछले 15 वर्ष में घर-घर जाकर कृत्रिम घोंसले लगाए गए हैं।
क्योंकि गौरैया जलवायु का अंग है। जहां गौरैया होती है, वहां की जलवायु अनुकूल मानी
जाती है। उन्होंने कहा कि गौरैया के कम होने का करण वातावरण में प्रदूषण और जंगलों का
कटान है इसलिए इनका वास कम होता जा रहा है। रेडिएशन भी गौरैया के लिए दुश्मन है।
गौरैया विलुप्त होने की कगार पर है। इसे संरक्षित करना बहुत आवश्यक है। गौरैया बचेगी तो
हमारा अस्तित्व भी बचेगा।
घोंसले बनवाकर कर रहे वितरित
संजयनगर निवासी रामवीर सिंह एडवोकेट सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वह बताते हैं कि गौरैया
को बचाने के लिए लकड़ी और मिट्टी के घोंसले बनवा रहे हैं। मिट्टी के बर्तन में पानी रखने के
फायदों के बारे में बताते हैं। जगह-जगह चिड़िया के लिए दाना उपलब्ध कराते हैं। लोगों को
जागरूक करने के लिए अभियान चला रहे हैं। उन्हें बताया कि घर में थोड़ी जगह छोड़ी जाए,
जिससे ये अपना घर बना सकें। जहां चिड़िया रहती हैं, वहां इंसान को रहने में दिक्कत नहीं
होगी। लोगों को गौरैया को बचाने के लिए आगे आना होगा। मिशन बनाना होगा। तभी हम
प्यारी गौरैया को बचा सकेंगे।
- सर्वे में लगातार घटी है गौरैया
वर्ष 2011 में कराए गए सर्वे के अनुसार गाजियाबाद महानगर की आबादी 18 लाख थी।
प्रत्येक व्यक्ति गौरैया की संख्या छह थी। कुल संख्या 72 लाख बताई गई थी। जो 2015 के सर्वे
तक आते-आते प्रत्येक व्यक्ति पर गौरैया की संख्या चार ही रह गई। बताया गया कि 2021 में महानगर की जनसंख्या 28 लाख है और गौरैया की संख्या अब पांच हो गई है।
- लॉकडाउन में बढ़ी गौरैया की संख्या
सर्वे के अनुसार मार्च 2020 में लॉकडाउन लगा था। लगभग दो से तीन महीने लोग घरों से
बाहर ही नहीं निकले थे। इस दौरान गौरैया की संख्या सबसे ज्यादा बढ़ी। यही कारण रहा
कि प्रत्येक व्यक्ति चार गौरैया की संख्या बढ़कर प्रत्येक व्यक्ति पांच हो गई। विजयपाल बघेल
ने बताया कि इस दौरान प्रदूषण नाम मात्र ही रह गया था।
- नई पीढ़ी दाना-पानी डालने की परंपरा को करे जीवित
गौरेया या अन्य पक्षियों को बचाने के लिए नई पीढ़ी को दाना और पानी डालने की परंपरा
जीवित करना होगा। पहले की तरह लोगों को छत या बालकनी में पानी और दाना उपलब्ध कराना
होगा। उनके प्राकृतिक आवास को भी बचाना होगा। गौरैया इंसान की सच्ची दोस्त भी है और पर्यावरण संरक्षण में उसकी खास भूमिका भी है।