छोटी बहन ने किडनी देकर बचाया बड़ी का जीवन
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन निवासी युक्ता (बदला हुआ नाम) नोएडा में एक कंपनी में कंप्यूटर इंजीनियर हैं। तीन साल पहले उन्होंने सिजेरियन डिलिवरी से बेटे को जन्म दिया। दो महीने बाद कमर में बाई ओर दर्द हुआ। दर्द के साथ ही उल्टी होने लगी। शरीर पर सूजन आ गई। जांच के बाद पता चला कि किडनी खराब हो गई है। डॉक्टर ने युक्ता को दिल्ली रेफर कर दिया। यह सुनकर किडनी बदलनी होगी, पैरों तले जमीन खिसक गई। ऐसे में छोटी बहन बड़ी की जिंदगी बचाने के लिए छोटी बहन ने किडनी दान की।
वैसे तो यह किडनी दान करने का एक केस है, लेकिन युक्ता के लिए दूसरी जिंदगी है। कम उम्र में किडनी का खराब हो जाना परिवार के लिए गहरा सदमा था। युक्ता के एक बड़ा और एक छोटा भाई है। उस वक्त बड़े भाई को टायफाइड और पीलिया हो गया। छोटे भाई का ब्लड ग्रुप मैच नहीं किया। सात साल छोटी बहन का ब्लड ग्रुप मैच हुआ। तब उसने किडनी दी। युक्ता के अलावा 10 मामले और हैं, जिसमें परिवार के सदस्यों ने अपनों के लिए अपना शरीर का एक हिस्सा दान कर उन्हें नई जिंदगी दी है। सीएमओ डॉ. एनके गुप्ता ने बताया कि एक साल में 11 किडनी ट्रांसप्लांट के मामलों की इजाजत दी गई। यह वो मामले हैं, जिनमें परिवार का सदस्य न होने के कारण इजाजत ली गई है। गौरतलब है कि इस बार वर्ल्ड किडनी डे की थीम ‘लिंविंग वेल विद किडनी डिजीज’ है। यानी किडनी की बीमारी होने के बाद भी किस तरह बेहतर जीवन व्यतीत किया जा सकता है। इस पर फोकस है। कोलंबिया एशिया अस्पताल के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. केशवदास साधवानी का कहना है कि बदलती जीवन शैली ने हमारे शरीर को भी बदल दिया है। इसका सीधा असर हमारी किडनी पर पड़ता है। कुछ एंटीबायोटिक दवाएं भी नुकसान पहुंचाती हैं। मधुमेह और उच्च रक्तचाप भी किडनी विफलता का मुख्य कारण हैं। ऐसे में जरूरी है कि हम खानपान पर विशेष ध्यान दें। कई बार गलत दवाइयों का प्रयोग करने और संक्रमण के कारण परेशानी हो जाती है। उन्होंने कहा कि खून की कमी, कमजोरी, जल्दी थकान लगना, शरीर में पीलापन, किडनी की खराबी के शुरुआती लक्षण हैं।