पैसे लेकर मनचाही कोरोना जांच रिपोर्ट बनाने के मामले की होगी जांच
गाजियाबाद। पैसे लेकर मनचाही कोरोना जांच रिपोर्ट बनाने के मामले में सीएमओ डॉ. एनके गुप्ता ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने जिला मलेरिया अधिकारी ज्ञानेंद्र मिश्रा को जांच अधिकारी नामित करते हुए दो दिन में रिपोर्ट मांगी है। 14 फरवरी के अमर उजाला के अंक में ‘पैसे दो...कोरोना की कैसी भी रिपोर्ट लो ’ शीर्षक से खबर छपी थी। जिसमें बताया गया था कि हजार रुपये लेकर स्वास्थ्यकर्मी आपके मनमुताबिक रिपोर्ट बनवाने को तैयार रहते हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए सीएमओ ने जांच के आदेश दिए हैं। खबर छपने के बाद सीएमओ ने कोरोना की सैंपलिंग करने वाले सभी लैब टेक्नीशियन को तलब कर फटकार भी लगाई है।
स्टिंग के दौरान एमएमजी अस्पताल में खिड़की पर जांच करने वाले कर्मचारी ने बताया था कि एक हजार रुपये में किस तरह से कोरोना पॉजिटिव की रिपोर्ट बिना जांच कराए मिल जाती है। साथ ही कर्मचारी ने यह भी बताया था कि पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर निगरानी के लिए कॉल आने पर किस तरह से बचाव करना है।
इस समय कोरोना संक्रमण के मामले कम होने के बाद जांच भी कम कर दी गई है। प्रतिदिन 750 सैंपल का लक्ष्य हैं, उसमें से छह सौ से लेकर सात सौ तक जांच हो रही है। अभी जिला एमएमजी अस्पताल, सीजीएचएस डिस्पेंसरी कमला नेहरूनगर, इंदिरापुरम गुरुद्वारा, वैशाली अरबन पीएचसी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोनी, डासना, मोदीनगर एवं मुरादनगर में जांच की जा रही है। इसके अलावा पांच स्थाई कलेक्शन सेंटर हैं जो एमएमजी अस्पताल, महिला चिकित्सालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भोजपुर, डासना जेल एवं ईएसआई अस्पताल राजेंद्र नगर में संचालित है। दो मोबाइल वैन के अलावा छह स्थानों पर मोबाइल टीम अलग से सैंपलिंग करती है। इस समय कोरोना संक्रमण के पांच से दस मरीजों की पुष्टि हो रही है। जांच कराने वालों में अधिकांश संख्या उन लोगों की है, जिनसे कार्यालय में रिपोर्ट मांगी गई हो, किसी मरीज का किसी तरह का ऑपरेशन कराना हो या गर्भवती का प्रसव कराना हो। केंद्र एवं राज्य सरकार के निर्देश पर किसी भी संस्थान में काम करने वाला व्यक्ति अगर कोरोना संक्रमण की चपेट में आता है तो उसे वेतन सहित 14 दिन का अवकाश मिलता है। ऐसे में कई लोग ऐसे भी हैं जो बिना किसी बीमारी के सिर्फ इसलिए कोरोना की पॉजिटिव रिपोर्ट लेते हैं कि उन्हें कार्यालय से आसानी से अवकाश मिल जाए। इसी बात का स्वास्थ्य कर्मी फायदा उठाते हैं।
अभी तक किसी भी सेंटर से पैसे लेकर जांच करने की शिकायत नहीं मिली थी। खबर का संज्ञान लेते हुए अस्पताल में जांच करने वाले स्टॉफ को हटा दिया गया है। जिला मलेरिया अधिकारी को जांच अधिकारी बनाते हुए दो दिन में रिपोर्ट मांगी है। अगर पैसे लेने की पुष्टि होती है तो उसके खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई जाएगी। -डॉ . एनके गुप्ता, सीएमओ