प्रथमा बैंक घोटाले में चार दोषियों को तीन-तीन साल की सजा
गाजियाबाद। सीबीआई कोर्ट ने मुरादाबाद के प्रथमा बैंक घोटाले में चार दोषियों को तीन-तीन साल की सजा सुनाई है। चारों अभियुक्तों ने लाभांश (डिविडेंड) चुराकर 44 लाख रुपये हड़प लिया था। सीबीआई कोर्ट के न्यायाधीश जगदीश प्रसाद ने चारों अभियुक्तों को पहले दोषी करार दिया था। मामले की सुनवाई के दौरान बैंक के एक प्रबंधक दिनेश कुमार की मौत हो गई थी। दूसरे प्रबंधक ललित कुमार चौहान, राजीव, संजीव व अमित कुमार को विशेष अदालत ने तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई।
सीबीआई के लोक अभियोजक हरिमोहन ने बताया कि प्रथमा बैंक के चेयरमैन टीबी भट्ट ने फरवरी 2006 को सीबीआई देहरादून से शिकायत की थी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि मुरादाबाद स्थित प्रथमा बैंक की शाखा के प्रबंधक दिनेश कुमार से साठगांठ कर मैसर्स विनायक ग्रुप हाउसिंग सहकारी समिति के सचिव रजनीश जैन व अन्य ने जुलाई 2004 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर समिति के नाम से चालू खाता खुलवाया। इसमें समिति के कार्यालय का पता भी फर्जी दिया गया था। मई 2005 में मैसर्स विनायक ग्रुप हाउसिंग सहकारी समिति के सचिव रजनीश जैन उर्फ अशोक सहगल ने चेयरमैन कमल कुमार वर्मा के साथ मिलकर व्यक्तिगत नाम पर जारी लाभांश पत्र चोरी किए। यह लाभांश पत्र डाटा मैजिक साफ्टवेयर सर्विस लिमिटेड द्वारी जारी किए गए थे। आरोपियों ने लाभांश पत्रों पर फर्जी तरीके से अपनी सहकारी समिति का नाम अंकित किया। इसके बाद लाभांश पत्र के जरिए पैसा समिति के खाते भुगतान होने के बाद निकाल लिए। लोक अभियोजक ने बताया कि रजनीश जैन उर्फ अशोक सहगल ने जुर्म कबूल कर लिया था। अदालत उसे पहले ही सजा सुना चुकी है।