गाजियाबाद स्थित एनडीआरएफ के 120 जवानों ने उत्तराखंड के जंगलों में लगी भीषण आग पर बिना तकनीकी प्रशिक्षण और जरूरी उपकरणों के अभाव में भी काबू पा लिया है। टीम ने विदेशों में जंगलों में लगी आग को बुझाने में प्रयोग की जाने वाली विशेष तकनीक का उत्तराखंड में सफल उपयोग किया है।
उत्तराखंड से रविवार को यहां लौटे नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एनडीआरएफ) की 8वीं बटालियन के कमांडेंट पीके श्रीवास्तव ने अमर उजाला को बताया कि 29 अप्रैल को 40-40 जवानों की तीन टीमों को अल्मोड़ा, पौड़ी और चमोली भेजा गया था।
तब तक जंगलों में आग पूरी तरह फैल चुकी थी। विदेशी तरीके का प्रयोग कर उनकी टीम ने 29 अप्रैल से 3 मई के बीच आग पर काबू पा लिया। चार मई को बारिश हो गई थी। हालांकि अल्मोड़ा में 6 मई तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला।
कमांडेंट ने बताया कि पहाड़ पर बसीं बस्तियों के पास तक आग पहुंच गई थी। ऐसे में उन्होंने आग पर काबू पाने के लिए आग का सहारा लिया। आग वाले क्षेत्र के चारों ओर कुछ दूरी पर जवानों ने सर्कल में आग लगा दी।
इससे बीच में लगे पेड़-पौधे और झाड़ियां जल गए और आगे बढ़ने का साधन न मिलने पर आग कमजोर पड़ गई। इस बीच जवानों ने घरों के आगे गड्ढे खोद दिए थे। वहां से सूखे पत्ते व लकड़ियों को हटा दिया गया, ताकि आग को आगे बढ़ने का कोई सहारा न मिले।
आग जब वहां पहुंची तो पेड़ों की टहनियों से वार कर आग को बुझा दिया गया। श्रीवास्तव ने कहा कि उस मुश्किल हालात में जवानों का कमिटमेंट देखने लायक था। स्थानीय लोगों का भी भरपूर सहयोग मिला।
नहीं मिलता विशेष प्रशिक्षण
बकौल पीके श्रीवास्तव एनडीआरएफ जवानों को आग बुझाने के लिए प्रशिक्षित नहीं किया जाता है। यह पहला मौका था कि जब वे आग बुझाने के इतने बडे़ मिशन पर गए थे।
काम आए यूएस के एक्सपर्ट
कमांडेंट ने बताया कि यह सौभाग्य की बात रही कि अप्रैल के अंतिम सप्ताह में यूएस से डिजास्टर के दो एक्सपर्ट प्रशिक्षण देने गाजियाबाद आए थे। इनमें से एक जंगल में लगी आग बुझाने के एक्सपर्ट थे। उन्होंने इस काम में हमारी मदद की और आग बुझाने के कुछ खास तरीके बताए। आग बुझाए जाने के दौरान गाजियाबाद से उत्तराखंड के प्रभावित 49 लोकेशन पर जवानों को गाइड लाइन दी जाती रही।
अभी भी तैनात हैं टीमें
आग बुझ जाने के बाद भी उत्तराखंड के लोगों में भय व्याप्त है। इस कारण स्थानीय प्रशासन ने एनडीआरएफ की तीनों टीमों को अभी उत्तराखंड में रोके जाने का अनुरोध किया है। बारिश में लैंड स्लाइड का खतरा भी बना रहता है और प्रशासन को लगता है कि जवानों की जरूरत पड़ सकती है। बता दें कि गाजियाबाद स्थित एनडीआरएफ का कार्य क्षेत्र दिल्ली-एनसीआर के अलावा हरियाणा और उत्तराखंड है।