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गुनहगारों को मिली सजा लेकिन...: छिन गया बचपन, 12 की उम्र में दिया बच्चे को जन्म, जानें किस हाल में है पीड़िता

Tue, 24 Jan 2023 09:36 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद

सार

पढ़ें कि भले ही बच्ची के दोषियों को सजा मिल गई हो लेकिन उस मासूम का कैसा हाल है जो खुद खिलौनों से खेलने की उम्र में मां बन गई। 110 दिन में आए इस फैसले के बाद क्या उसकी जिंदगी बदल पाएगी, पढ़ें पूरी खबर...
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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एक साल पहले खोड़ा क्षेत्र में 11 वर्षीय बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म में पाक्सो कोर्ट ने दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इस मामले में तीसरे आरोपी की अलग सुनवाई चल रही है, जबकि एक किशोरी बाल सुधार गृह में है और बच्चे की मौसी अभी भी फरार है।

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दोषियों को सजा देते हुए विशेष न्यायधीश (पॉक्सो एक्ट) हर्षवर्धन ने सोमवार को बेहद सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा, 'अभियुक्तों ने पड़ोसी होते हुए भी अकेला देखकर बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और फिर आठ माह तक करते रहे जिसकी वजह से वह महज 11 साल की उम्र में गर्भवती हो गई और पढ़ने-लिखने, खेलने-कूदने की उम्र में उसने बच्चे को जन्म दिया। उनके घिनौने कृत्य ने बच्ची का बचपन और संपूर्ण जीवन बर्बाद कर दिया...'

आगे पढ़ें कि भले ही बच्ची के दोषियों को सजा मिल गई हो लेकिन उस मासूम का कैसा हाल है जो खुद खिलौनों से खेलने की उम्र में मां बन गई। 110 दिन में आए इस फैसले के बाद क्या उसकी जिंदगी बदल पाएगी, पढ़ें पूरी खबर...

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छूटी बच्ची की पढ़ाई

बच्ची के पिता सुबह ही कोर्ट पहुंच गए थे। फैसले के बाद उन्होंने कहा कि दरिंदों को सजा तो मिल गई लेकिन बच्ची का जीवन तो बर्बाद ही हो गया। उसका बचपन कैसे लौट सकता है? वह सातवीं कक्षा में पढ़ती थी। बच्चे को जन्म देने बाद से स्कूल नहीं गई। उसकी पढ़ाई छूट चुकी है। हर वक्त सहमी रहती है।

पिता ने कहा, हमें डर रहता है कि उस पर कोई हमला न कर दे। दोषी पाए गए युवकों के परिजन समझौते के लिए दबाव बनाते हैं। कभी भी घर में आ जाते हैं। वे जान से मारने की धमकी दे चुके हैं। इसकी शिकायत खोड़ा थाना में दर्ज कराएंगे।

'पत्थर सी हो गई मेरी बच्ची'

फैसला आने के बाद बच्ची की मां कहा कि उन्हें दोषी युवकों को फांसी की सजा मिलने की उम्मीद थी। इसके लिए ही प्रार्थना की थी। हमारी फूल की बच्ची का जीवन बर्बाद हो गया है। यह पत्थर सी हो गई है। जो उसकी हालत देखता है और उसकी आपबीती सुनता है, उसके आंसू निकल आते हैं।

उन्होंने बताया कि वह सिर्फ इसलिए कोर्ट नहीं गईं क्योंकि डर था कि फैसला सुनकर बच्ची को कोई घबराहट न हो जाए। उसे संभालना जरूरी था। वह पूछ रही थी कि कोर्ट में आज क्या होगा?। उन्हें तसल्ली है कि फैसला आने में बहुत देरी नहीं हुई। विशेष लोक अभियोजक हरीश कु मार ने पैरवी में कोई कमी नहीं की।
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12 की उम्र में जिस बच्चे को दिया जन्म वो अनाथालय में पल रहा

मेरठ मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में बेटा पैदा होने के बाद बच्ची के परिजनों ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। बच्चा पैदा होने के बाद मां ने उसकी तरफ देखा भी नहीं था। मेरठ से आने के बाद प्रशासन की देखरेख में बच्चा अनाथालय में पल रहा है।

 
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