यह समस्त सभ्य समाज के विरुद्ध अपराध
सजा सुनाए जाने से पहले अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता ने कहा, दोनों अभियुक्तों ने उस बच्ची के साथ दुष्कर्म किया जिसकी उम्र महज 11 साल चार माह और छह दिन थी। यह कृत्य समस्त सभ्य समाज के विरुद्ध अपराध है और महिलाओं के सर्वोच्च सम्मान व मर्यादा पर कठोर आघात है। ऐसे अभियुक्त को मृत्युदंड से दंडित किया जाए जिससे इस प्रकार के अपराध की पुनरावृत्ति समाज में न हो।
बचाव पक्ष के वकील ने दलील रखी कि दोनों अभियुक्तों का यह पहला अपराध है। दोनों छात्र हैं और उम्र 19 व 21 साल है। अगर दोनों को मृत्युदंड दिया गया तो उनके परिवार में माता-पिता की देखभाल करने वाला कोई नहीं बचेगा। इस आधार पर दोनों को कम से कम सजा से दंडित किया जाए।
हमें मृत्युदंड की उम्मीद थी, मां का छलका दर्द
फैसला आने के बाद बच्ची की मां कहा कि उन्हें दोषी युवकों को फांसी की सजा मिलने की उम्मीद थी। इसके लिए ही प्रार्थना की थी। हमारी फूल की बच्ची का जीवन बर्बाद हो गया है। यह पत्थर सी हो गई है। जो उसकी हालत देखता है और उसकी आपबीती सुनता है, उसके आंसू निकल आते हैं। उन्होंने बताया कि वह सिर्फ इसलिए कोर्ट नहीं गईं क्योंकि डर था कि फैसला सुनकर बच्ची को कोई घबराहट न हो जाए। उसे संभालना जरूरी था। वह पूछ रही थी कि कोर्ट में आज क्या होगा?। उन्हें तसल्ली है कि फैसला आने में बहुत देरी नहीं हुई। विशेष लोक अभियोजक हरीश कुमार ने पैरवी में कोई कमी नहीं की।
बच्ची की पढ़ाई छूटी, हर वक्त सहमी रहती है: पिता
बच्ची के पिता सुबह ही कोर्ट पहुंच गए थे। फैसले के बाद उन्होंने कहा कि दरिंदों को सजा तो मिल गई लेकिन बच्ची का जीवन तो बर्बाद ही हो गया। उसका बचपन कैसे लौट सकता है? वह सातवीं कक्षा में पढ़ती थी। बच्चे को जन्म देने बाद से स्कूल नहीं गई। उसकी पढ़ाई छूट चुकी है। हर वक्त सहमी रहती है। हमें डर रहता है कि उस पर कोई हमला न कर दे। दोषी पाए गए युवकों के परिजन समझौते के लिए दबाव बनाते हैं। कभी भी घर में आ जाते हैं। वे जान से मारने की धमकी दे चुके हैं। इसकी शिकायत खोड़ा थाना में दर्ज कराएंगे।
तीसरे आरोपी ने दाखिल की जमानत अर्जी
दुष्कर्म के तीसरे आरोपी दुकानदार ने सोमवार को अदालत में जमानत अर्जी दाखिल की। अदालत ने सुनवाई के लिए तीन फरवरी की तारीख लगाई है, जबकि मुकदमे में नियमित सुनवाई के लिए 25 जनवरी तारीख लगी है। दुष्कर्म में सहयोगी बच्ची की सहेली किशोरी संप्रेक्षण गृह में है।
अनाथालय में पल रहा है बच्चा
मेरठ मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में बेटा पैदा होने के बाद बच्ची के परिजनों ने उसे स्वीकार करने से इन्कार कर दिया था। बच्चा पैदा होने के बाद मां ने उसकी तरफ देखा भी नहीं था। मेरठ से आने के बाद प्रशासन की देखरेख में बच्चा अनाथालय में पल रहा है।