सभी केंद्रों के ध्यानार्थ...
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आंदोलन स्थल हमारा गांव, यहीं रहेंगे किसान : राकेश टिकैत
- यूपी गेट पर मंगलवार से प्रतिरोध सप्ताह की शुरुआत की गई
- किसान कोरोना गाइडलाइन और सोशल डिस्टेंसिंग का कर रहे पालन
माई सिटी रिपोर्टर
साहिबाबाद। आंदोलन स्थल हमारा गांव है, किसी कॉलोनी और गांव को खाली करने से कोरोना खत्म नहीं होगा। किसान यूपी गेट बॉर्डर से कहीं नहीं जा रहे हैं। किसान कोरोना गाइडलाइन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करेंगे। आंदोलन स्थल पर यह बातें भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कही। इस दौरान प्रतिरोध सप्ताह की शुरुआत की गई। जिसके तहत किसानों से कोरोना गाइडलाइन के नियमों का पालन करने की अपील की गई।
राकेश टिकैत ने कहा कि आंदोलन स्थल पर किसी किसान को कोरोना होता है तो उससे आंदोलन स्थल के सबसे पास के अस्पताल मैक्स में ले जाया जाएगा। जहां पर उसका इलाज होगा। प्रबंधन को दस प्रतिशत कोटा किसानों के रखने के लिए बोल दिया गया है। उन्होंने कहा कि डर दिखाकर शाहीन बाग के आंदोलन को खत्म करा दिया गया था। सरकार किसानों के इस आंदोलन को शाहीन बाग जैसा आंदोलन न समझे। सरकार गलतफहमी में न रहे। यह किसानों का आंदोलन है। यह आंदोलन खत्म नहीं होगा। जब तक सरकार से बातचीत नहीं होगी और जब तक किसानों के मसलों का समाधान सरकार नहीं करेगी, तब तक यह आंदोलन चलेगा। सरकार किसानों को एक बार फिर डरा रही है। सरकार किसानों के खिलाफ एक्शन लेगी तो किसान भी तैयार हैं। किसानों ने एक्शन लिया तो भाजपा का कोई भी नेता गांव में घुस नहीं पाएगा।
क्या बंगाल में कोरोना नहीं है
राकेश टिकैत ने कहा कि बंगाल में चुनाव हो रहा है। वहां पर नेता बड़ी बड़ी रैलियां कर रहे हैं वहां पर कोरोना नहीं है लेकिन यहां पर किसान चुपचाप बैठे हैं तो यहां पर कोरोना का डर दिखाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना को देखते हुए किसानों ने भी अपनी रैलियां खत्म कर दी हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन में किसान कम हो रहे हैं क्योंकि किसान गेहूं काट रहे हैं, गन्ने की छिलाई कर रहे हैं और चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, सरकार भी चुनाव में गई है। वह चार तारीख तक लौटेगी तब तक किसान भी आंदोलन स्थल पर जुट जाएंगे। उन्हें उम्मीद है कि पांच तारीख के बाद सरकार और किसानों के बीच बातचीत हो सकती है।
किसानों ने घर जा रहे मजदूरों के लिए भिजवाया खाना
भारतीय किसान यूनियन ने कौशांबी बस अड्डे से अपने घर जा रहे मजदूरों के लिए खाने की व्यवस्था की। किसानों ने आंदोलन स्थल पर मजदूरों के लिए खाना तैयार कराया। जिसके बाद पैकेट बनाकर बस अड्डे पर मजदूरों को बंटवाया। राकेश टिकैत ने कहा कि वह सुबह कर्नाटक से पंचायत कर लौट रहे थे। बस अड्डे पर मजदूरों की भीड़ देखी। यह मजदूर रात से भूखे प्यासे थे। वह आंदोलन स्थल पर पहुंचे और मजदूरों के लिए खाना बनवाकर भिजवाया।