मुआवजे की रकम का बोझ बढ़ा तो जीडीए अब मधुबन-बापूधाम आवासीय योजना के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन की पुन: समीक्षा करेगा। जीडीए वीसी की अध्यक्षता में अफसरों की कमेटी जमीन का असेसमेंट करेगी और जरूरत से ज्यादा जमीन होने पर किसानों को लौटाई जाएगी।
बृहस्पतिवार को लखनऊ में हुई जीडीए बोर्ड बैठक में किसानों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक बढ़ा मुआवजा देने, ई-टेंडरिंग लागू करने समेत 22 में से 20 प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई है। हालांकि जीडीए बोर्ड ने शहर के आउटडोर सर्विलांस सिस्टम (सीसीटीवी कैमरे आदि) पर अकेले पैसा खर्च करने से इंकार कर दिया है।
प्रमुख सचिव आवास सदाकांत की अध्यक्षता में लखनऊ में हुई बैठक में 22 प्रस्तावों पर मंथन हुआ। मधुबन-बापूधाम आवासीय योजना में जीडीए को 270 एकड़ जमीन का मुआवजा देना है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब यह मुआवजा भूमि अधिग्रहण की नई पॉलिसी के मुताबिक देना पड़ेगा।
इससे जीडीए पर 1038 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ रहा है। यह प्रस्ताव बोर्ड बैठक में रखा गया तो प्रमुख सचिव आवास सदाकांत ने इस पर निर्णय लेने के लिए जीडीए वीसी की अध्यक्षता में कमेटी बना दी।
अब यह कमेटी इस आवासीय योजना की जमीन की समीक्षा कर तय करेगी कि जीडीए को कितनी जमीन चाहिए। इसी योजना में जीडीए ने ट्रांसपोर्ट नगर बनाने की प्लानिंग भी की थी।
सूत्रों की मानें तो यह भी संभव है कि अब जीडीए सिर्फ सड़क, पार्क, स्कूल, अस्पताल, नाले, नालियां, नलकूप आदि सामुदायिक सुविधाओं के लिए जरूरी जमीन का ही अधिग्रहण कर मुआवजा दे। हालांकि जीडीए सचिव रविंद्र गोडबोले का कहना है कि जमीन लौटाने पर कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। अभी समीक्षा के निर्देश मिले हैं।
ई टेंडरिंग से आएगी पारदर्शिता
उधर, जीडीए में एक अप्रैल से ई-टेंडरिंग लागू करने के प्रस्ताव को भी बोर्ड से मंजूरी मिल गई है। इससे जीडीए के ठेकों में पारदर्शिता आएगी। ई-टेंडरिंग 40 लाख से ज्यादा के ठेकों में की जाएगी।
इस व्यवस्था के लागू हो जाने से कांट्रेक्टर टेंडर को मैनेज नहीं कर सकेंगे। बैठक में जीडीए वीसी विजय कुमार यादव, अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा, सीएटीपी इश्त्यिाक अहमद, चीफ इंजीनियर एसके द्विवेदी, बोर्ड सदस्य अनिल स्वामी, जेपी कश्यप, सिंहराज, उम्मेद पहलवान मौजूद रहे।
स्टाफ भवन बेचेगा जीडीए
जीडीए बोर्ड ने अधिकारियों और कर्मचारियों को आवंटित स्टाफ भवनों को बेचने का प्रस्ताव भी पास कर दिया है। इससे कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को कम रेटों पर मकान मिल जाएगा।
सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम के लिए सभी विभाग देंगे पैसा
शहर में सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम को चालू रखने के लिए पैसा देने के प्रस्ताव पर प्रमुख सचिव ने सवाल उठाया कि जीडीए अकेले पैसा क्यों दे। इसमें अन्य सरकारी विभागों की हिस्सेदारी भी होनी चाहिए।
इसके लिए उन्होंने मंडलायुक्त की अध्यक्षता में कमेटी बना दी है। मंडलायुक्त बैठक बुलाकर तय करेंगे कि कौन सा विभाग सर्विलांस पर आने वाले खर्च में कितना हिस्सा देगा। यह तय करने के बाद प्रस्ताव अगली बैठक में पेश किया जाएगा।
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लैंडयूज बदला
जीडीए बोर्ड ने पुलिस सिटी सहकारी आवास समिति लिमिटेड के 19 खसरा नंबरों का कृषि भू-उपयोग से आवासीय में परिवर्तन कर परिवर्तन शुल्क जमा कराने का प्रस्ताव भी पास कर दिया है। यह जमीन शाहपुर बम्हैटा में है।
इसके अलावा राजनगर आवासीय योजना के तलपट मानचित्र में आंशिक संशोधन को भी मंजूरी मिल गई है। हालांकि रामपुरी कालोनी में सिनेमाघर के लिए आरक्षित 3500 वर्ग मीटर के प्लाट का लैंडयूज बदलने का प्रस्ताव अटक गया है। प्रमुख सचिव आवास सदाकांत ने इस पर सवाल उठाए हैं। इनका निस्तारण कर यह प्रस्ताव भी अगली बैठक में रखा जाएगा।
खेल मैदान, बिजलीघर बनाने पर सहमति
अटौर में 25 बीघा जमीन पर खेल मैदान विकसित करने के प्रस्ताव को भी सहमति मिल गई। ग्राम पंचायत की जमीन पर जीडीए अपने खर्च से यह खेल मैदान तैयार कर फुटबॉल, वॉलीबाल कोर्ट और पाथ-वे तैयार करेगा। इसके अलावा कविनगर के आई व जी ब्लाक के बीच ओपन स्पेस की 1200 वर्ग मीटर भूमि पर विद्युत उपकेंद्र बनाने का प्रस्ताव भी पास हो गया।
इन प्रस्तावों को भी मिली मंजूरी
चालू वित्तीय वर्ष के बजट में कई मदों में धनराशि का पुनर्विनियोजन को मंजूरी
राजेंद्र नगर सेक्टर-5 में साईं वाटिका पार्क में सामुदायिक भवन को आयुर्वेद चिकित्सालय को देना
कर्मचारियों के मेडिकल बिलों का भुगतान
हाईस्कूल के लिए आवंटित भूखंड पर इंटरमीडिएट की मान्यता लेने व संचालन की अनुमति
ट्रैफिक पुलिस को किराए पर उपलब्ध कराई गई क्रेनों की अवधि एक साल बढ़ाने पर मंजूरी
अधिकारियों-कर्मचारियों को मोबाइल भत्ते का पुनरीक्षण और अन्य कर्मचारियों को सुविधा देना