गाजियाबाद। नोएडा सेक्टर-62 से साहिबाबाद तक मेट्रो के तीसरे चरण के प्रोजेक्ट की उपयोगिता पर गाजियाबाद-जेवर नमो भारत कॉरिडोर की मंजूरी के बाद उठे सवाल अब खत्म हो गए हैं। शासन के निर्देश पर कराए गए सर्वे में डीएमआरसी और एनसीआरटीसी ने दोनों प्रोजेक्ट की उपयोगिता और महत्व अलग-अलग बताकर जीडीए अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपी थी। अध्ययन के बाद जीडीए वीसी ने इस रिपोर्ट को सोमवार को शासन को भेज दिया है। अब शासन स्तर पर मेट्रो कॉरिडोर की डीपीआर पर फैसला लिया जाएगा।
गाजियाबाद-जेवर आरआरटीएस कॉरिडोर को मंजूरी मिलने के बाद शासन ने पूछा था कि इसके बनने से कहीं मेट्रो के तीसरे चरण की उपयोगिता तो कम नहीं हो जाएगी। आरआरटीएस कॉरिडोर भी ग्रेटर नोएडा को गाजियाबाद से जोड़ेगा। इसके बाद जीडीए अधिकारियों ने एनसीआरटीसी और डीएमआरसी के अधिकारियों को बुलाकर बैठक की और सर्वे कराकर उनसे रिपोर्ट मांगी। इस रिपोर्ट में मेट्रो कॉरिडोर की उपयोगिता को भी ग्रीन सिग्नल दे दिया गया था। यह रिपोर्ट दोनों विभाग के अधिकारियों ने करीब 10 दिन पूर्व जीडीए को सौंप दी थी। जीडीए के मुख्य अभियंता मानवेंद्र सिंह का कहना है कि इसमें बताया गया कि दोनों प्रोजेक्ट के अलाइनमेंट में तकरीबन चार किलोमीटर की दूरी है।
इसकी वजह से दोनों प्रोजेक्ट की अलग-अलग उपयोगिता है। मेट्रो के तीसरे फेज में बनने वाले कॉरिडोर के जरिए गाजियाबाद और नोएडा मेट्रो से जुड़ जाएंगे। वहीं नमो भारत ट्रेन कॉरिडोर से ग्रेटर नोएडा होते हुए जेवर एयरपोर्ट जुड़ जाएगा। इसकी वजह से दोनों प्रोजेक्ट पर काम किया जा सकता है। इस रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद सोमवार को इसे शासन के पास भेज दिया है।