गाजियाबाद। इंदिरापुरम में 4.0702 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण के मामले में बीते सोमवार को जीडीए अधिकारी सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। जीडीए उपाध्यक्ष की ओर से इस प्रकरण में जवाब दाखिल किया गया। इसके बाद कोर्ट ने पूर्व में जारी स्थनग आदेश को निरस्त कर दिया। अब जीडीए के लिए इस जमीन पर कब्जा पाने का रास्ता साफ हो गया है।
जीडीए ने पूर्व में इंदिरापुरम में जमीन का अधिग्रहण किया था। इस मामले में सुधा भल्ला नाम की महिला की ओर से वर्ष 2017 में याचिका दाखिल कर 2014 में लागू हुए भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुसार प्रतिकर दिलाए जाने की मांग की थी। जीडीए ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी। इस मामले में हाईकोर्ट की ओर से स्थगन आदेश जारी किए जा चुके थे, जिसकी वजह से जीडीए इस प्रकरण का निस्तारण नहीं कर सका। प्रतिकर न मिलने के कारण याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर दी गई थी। पांच फरवरी को कोर्ट ने आदेश जारी कर दो सप्ताह में जीडीए उपाध्यक्ष को जवाब दाखिल करने के आदेश दिए थे। बीते सोमवार को जीडीए सचिव राजेश कुमार सिंह समेत प्राधिकरण के अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए और जवाब दाखिल किया। जीडीए सचिव का कहना है कि न्यायालय ने स्थगन आदेश निरस्त कर दिया है। अब इस मामले में अधिग्रहण की बकाया प्रक्रिया पूरी कराकर भूमि पर कब्जा लिया जा सकेगा। उनका कहना है कि जीडीए की ओर से जमीन के प्रतिकर की राशि पहले से ही तय कर दी गई थी। उनका कहना है कि जल्द ही उच्चतम न्यायालय के आदेश की प्रति मिल जाएगी, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।