गाजियाबाद। हाईकोर्ट से मुकदमा जीतने के बाद फाइलों में दबी गोविंदपुरम की नौ हजार वर्गमीटर जमीन जीडीए ने खोज ली है लेकिन उस पर फ्लैट बनाने के लिए बजट नहीं है। ऐसे में जीडीए अधिकारी योजना बना रहे हैं कि ग्रुप हाउसिंग योजना में बेचेंगे। अगर पूरे भूखंड के खरीदार नहीं मिले तो प्लाटिंग (छोटे भूखंड) करके नीलामी की जाएगी।
जीडीए के अपर सचिव सीपी त्रिपाठी का कहना है कि एक सप्ताह पहले रिकार्ड में एक फाइल की पड़ताल की गई तो गोविंदपुरम योजना में नौ हजार वर्गमीटर जमीन की जानकारी मिली। इस जमीन पर अदालत में केस चल रहा था। वर्ष 2014 में अदालत ने जीडीए के पक्ष में फैसला सुनाया था। जमीन की जानकारी मिलने पर पैमाइश कराई जा चुकी है। जमीन के संबंध में दस्तावेज नियोजन अनुभाग को भेजा गया है। अभी योजना तय की जाएगी कि एक साथ ग्रुप हाउसिंग के लिए एक साथ पूरा भूखंड बेचा जाए या छोटे - छोटे भूखंड के रूप में बेचे जाएं।
अगर छोटे भूखंड बनाकर बेचे गए तो 90 मीटर से 300 मीटर तक भूखंड तैयार किए जाने की योजना है। उन्होंने बताया कि मधुबन बापूधाम में 35 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर की दर है लेकिन वहां पर 45 से 65 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर पर नीलामी हुई है। गोविंदपुरम में 45 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर का रेट है, लेकिन वहां पर 65 से 75 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से भी नीलामी हुई है। ऐसे में अभी तय किया जाएगा कि किस तरह से भूखंड नीलाम किया जाएगा।
भूखंड की तरफ रुझान, नहीं बिक रहे फ्लैट
बजट के अभाव में जीडीए चंद्रशिला अपार्टमेंट बनाने के बाद पिछले 11 साल से कोई भूखंड योजना नहीं ला सका है। हालांकि केंद्र और राज्य सरकार के निर्देश पर जीडीए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत फ्लैट बना रहा है, लेकिन इसे बनाने का खर्च केंद्र और राज्य दे रही है।
जीडीए के एक अधिकारी ने बताया कि भूखंड नीलाम करने पर लोगों का रुझान अधिक रहता है। किसी भी क्षेत्र में भूखंड की नीलामी होती है तो एक भूखंड पर पांच से सात खरीदार आते हैं, लेकिन फ्लैट के खरीदार कम आते हैं। यही कारण है कि कौशांबी, कोयल एंक्लेव, मधुबन बापूधाम, चंद्रशिला अपार्टमेंट सहित कई अन्य क्षेत्रों में 2200 से अधिक फ्लैट बनकर कई साल से तैयार हैं, लेकिन इनके खरीदार नहीं मिल रहे हैं।