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Ghaziabad News: 77 हजार से ज्यादा कर्जदारों पर 1938 करोड़ बकाया

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गाजियाबाद। जिले में बैंकों का फंसा कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थिति यह है कि 77 हजार से अधिक खाताधारकों ने बैंक की पूरी किस्तें जमा नहीं कीं। अब उन्हें डिफाल्टर की श्रेणी में रखा गया है। इन खातों पर बैंकों का 1938 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। सबसे ज्यादा डिफाल्टर क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन लेने वालों में सामने आए हैं। ऐसे खातों की संख्या 25 हजार के पार पहुंच गई है।
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अग्रणी बैंक प्रबंधक बुद्धराम ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-2026 के दौरान बैंकों की ओर से दिए गए ऋण और बकाया खातों की समीक्षा में सामने आया कि 77,774 खाताधारकों ने विभिन्न बैंकों से ऋण लेने के बाद नहीं लौटाया। नोटिस भेजे जाने के बावजूद भुगतान नहीं होने से बैंकों की वित्तीय स्थिति पर असर पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और आसान ऋण सुविधा के चलते बड़ी संख्या में लोगों ने पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल किया। बाद में भुगतान में चूक होने लगी। लगातार बढ़ते बकाये को देखते हुए अब बैंक रिकवरी अभियान तेज करने की तैयारी में हैं। कई मामलों में नोटिस जारी किए जा चुके हैं। बड़े बकायेदारों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
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एमएसएमई सेक्टर पर भी बढ़ा दबाव : डिफाल्टर खातों में एमएसएमई सेक्टर की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। जिले में 17,375 एमएसएमई इकाइयों ने ऋण की किस्तें समय पर जमा नहीं कीं। उद्योगों में बढ़ती उत्पादन लागत, बाजार में कमजोर मांग और कैश फ्लो की समस्या को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है। औद्योगिक संगठनों का कहना है कि छोटे और मध्यम उद्यम पहले से महंगी बिजली, कच्चे माल और वित्तीय दबाव से जूझ रहे हैं। ऐसे में बैंक की सख्ती बढ़ने से कई इकाइयों के संचालन पर असर पड़ सकता है। व्यापारी नेता देवेंद्र हितकारी ने कहा कि बाजार में अस्थिरता बनी हुई है और ब्याज दरें भी ऊंची हैं। ऐसे में बैंकों को सेटलमेंट के जरिये कर्जदारों को कुछ राहत देने पर विचार करना चाहिए।
रिकवरी एजेंसियों की बढ़ेगी सक्रियता : बैंकों ने अब बकाया वसूली के लिए रिकवरी एजेंसियों को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। लंबे समय से भुगतान नहीं करने वाले खातों की सूची तैयार की जा रही है। ऐसे मामलों में कानूनी नोटिस, संपत्ति कुर्की और सिबिल स्कोर खराब होने जैसी कार्रवाई की चेतावनी दी जा रही है। अग्रणी बैंक प्रबंधक का कहना है कि लगातार बढ़ रहे एनपीए से बैंकिंग व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।
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