इंदिरापुरम की गौर ग्रीन एवेन्यू सोसायटी में आग लगने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल दमकल विभाग की उस एनओसी पर खड़ा हो गया है, जो महज छह महीने पहले सभी व्यवस्थाएं सही मानकर जारी की गई थी। जिस बिल्डिंग तक आग बुझाने के लिए दमकल की गाड़ियां ठीक से पहुंच भी नहीं पाईं, उसी को कागजों में आपात स्थिति के लिए तैयार बताया गया था।
स्थानीय निवासियों ने फायर सिस्टम की खामियों को लेकर पहले ही आवाज उठाई थी। अब एनओसी के ऑनलाइन आवेदन के शुरू होने के बाद इसमें खानापूर्ति के आरोप भी लगे हैं। ऐसे में यह मुद्दा प्रशासनिक जांच के केंद्र में आ गया है। एनओसी प्रक्रिया में यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी होता है कि इमरजेंसी में दमकल वाहन आसानी से पहुंच सके और निकासी का रास्ता बाधित न हो। यहां दोनों ही मोर्चों पर सवाल खड़े हैं।
जिलाधिकारी रविंद्र मांदड़ के अनुसार, गठित जांच समिति एनओसी जारी होने समेत सभी पहलुओं की जांच कर रही है। तीन दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं और मंगलवार तक स्थिति साफ होने की उम्मीद है। उन्होंने साफ कहा कि यह लोगों की जान से जुड़ा मामला है, इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नया सिस्टम लगने के बाद दी गई थी एनओसी
सोसायटी के निवासियों का दावा है कि छह महीने पहले फायर सिस्टम अपग्रेड करने के बाद ही एनओसी का नवीनीकरण कराया गया था। इसके बावजूद 29 अप्रैल को हुए हादसे के दौरान फायर अलार्म के काम न करने और अन्य खामियों की शिकायतें सामने आई थीं। सोसायटी के ही रहने वाले रजनीश राघव ने वीडियो जारी कर आरडब्ल्यूए और फायर सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे। ऐसे में सोसायटी को एनओसी किस प्रकार जारी की गई, इस बारे में प्रशासन की टीम जानकारी कर रही है।
रास्ता रोकने वाला निर्माण खुद हटाएं, वरना कार्रवाई
इस बीच प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी हाईराइज इमारतों की जांच के आदेश दिए हैं। जीडीए ने आठों जोन से सात दिन में रिपोर्ट मांगी है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जो भी अवैध निर्माण आपात सेवाओं के रास्ते में बाधा बन रहे हैं, उन्हें संबंधित एओए या बिल्डर खुद हटाएं, अन्यथा प्रशासन कार्रवाई करेगा।
बालकनी में पीवीसी के इस्तेमाल को लेकर जारी होगी एडवाइजरी
आग के फैलने में बालकनी में लगी पीवीसी शीट की भूमिका भी सामने आई है, जिसे दमकल विभाग ने नियमों के खिलाफ बताया है। अब प्रशासन जल्द ही एडवाइजरी जारी कर ऐसे ज्वलनशील सामग्री के इस्तेमाल से बचने की चेतावनी देगा। इसमें हादसे से मिले सबक भी शामिल किए जाएंगे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।