स्मार्ट सिटी की दौड़ में पिछड़ने की बड़ी वजह गंदगी भी रही थी। निगम ने इसके बाद स्वच्छ भारत मिशन के तहत डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की योजना बनाई, लेकिन एक प्राइवेट फर्म ने इस पर भी ब्रेक लगा दिए।
फर्म ने कूड़ा कलेक्शन का कांट्रेक्ट तो ले लिया, लेकिन दो महीने बाद भी काम शुरू नहीं किया। नगर आयुक्त ने फर्म को चेतावनी दी है। एक सप्ताह में काम शुरू न करने पर नोटिस जारी कर अनुबंध रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी।
निगम के स्वास्थ्य विभाग ने ट्रायल बेस पर शुरू की गई इस योजना में सबसे पहले वसुंधरा जोन की कालोनियों और साइट-4 औद्योगिक क्षेत्र को शामिल किया था। कूड़ा कलेक्शन की एवज में प्रत्येक मकान से 70 रुपये कामर्शियल संस्थानों से 100 और उद्योग से 500 रुपये प्रतिमाह यूजर चार्ज तय किया गया है।
फर्म को घरों से कूड़ा लेकर अपने प्लांट पर निस्तारण करना है। नगर निगम ने एक प्राइवेट फर्म को मेयर उपचुनाव से पहले ही पांच साल के लिए कांट्रेक्ट दे दिया था। फर्म को वर्क आर्डर भी जारी किया जा चुका है। अभी भी फर्म ने काम शुरू नहीं किया।